टीआरपी डेस्क। धनतेरस और दिवाली के बाद लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह चार दिनों तक चलने वाला पर्व सूर्य उपासना और शुद्ध आचरण का प्रतीक माना जाता है। इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है, दूसरे दिन खरना का आयोजन होता है, तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाता है।

इस वर्ष सोमवार, 27 अक्टूबर को छठ का तीसरा दिन है। इस दिन शाम के समय व्रती घाटों पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे।

कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन व्रती निर्जला उपवास रखकर शाम को नदी, तालाब या किसी जल स्रोत के किनारे जाकर सूर्यदेव को दूध और जल मिश्रित अर्घ्य अर्पित करते हैं। अर्घ्य के लिए बांस के सूप में ठेकुआ, गन्ना, नारियल, फल और दीपक सजाए जाते हैं। इस दौरान सूर्य देव की उपासना ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र से की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

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हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष संध्या अर्घ्य का शुभ समय शाम 5 बजकर 10 मिनट से 5 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अगले दिन प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होगा।

धार्मिक मान्यता है कि छठ व्रत संतान की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और पारिवारिक कल्याण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में सूर्य का प्रभाव कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी होता है। यह व्रत आत्मसंयम, शुद्धता और भक्ति का अद्वितीय प्रतीक माना जाता है।