टीआरपी। Agahan guruwar : श्रीमद्भागवत गीता में अगहन मास यानी मार्गशीर्ष मास को श्रेष्ठ मास माना गया है। इस माह में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन के साथ प्रत्येक गुरुवार को महालक्ष्मी की पूजा करने को महत्व दिया गया है। इस वर्ष 6 नवंबर को गुरुवार के दिन ही अगहन मास का शुभारंभ हो रहा है। इस माह के सभी पांच गुरुवार को महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। इसकी तैयारी एक दिन पूर्व घर के मुख्य द्वार पर रंगोली सजाकर और पूजा घर में मंडप सजाकर महालक्ष्मी को आमंत्रित करने का आह्वान किया जाता है।
माह की शुरुआत और समापन भी गुरुवार को
6 नवंबर से अगहन माह की शुरुआत हो रही है, इसी दिन मास का पहला गुरुवार पड़ रहा है। इस दिन घर-घर में महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। खास बात यह है कि अगहन मास का समापन 4 दिसंबर को गुरुवार के दिन ही हो रहा है। इस तरह इस मास में पांच गुरुवार को महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा।
कार्तिक माह के अंतिम दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में पुण्य की डुबकी लगाई। गंगा यमुना सहित देशभर में सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में श्रद्धालु नदी किनारे पहुंचे और स्नान के पश्चात दीप प्रज्वलित करके नदी में प्रवाहित किया।
घर आंगन को रंगोली से सजाया, गुरुवार को रखेंगी व्रत
अगहन गुरुवार की पूर्व संध्या पर बुधवार को महिलाओं ने अपने घर आंगन को चावल के आटे से बनाई रंगोली से सजाया। द्वार से लेकर पूजा स्थल तक मां लक्ष्मी के पदचिन्ह उकेरे। शाम को दीप प्रज्वलित करके महालक्ष्मी को आमंत्रित किया। 6 नवंबर को सुबह स्नान, पूजन करके दिनभर व्रत रखने का संकल्प लेंगी। दोपहर को पुनः पूजा करके भोग अर्पित करने की परंपरा निभाएंगी। शाम को तीसरी बार पूजन के पश्चात प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारणा करेंगी। ऐसी मान्यता है कि अगहन माह में महालक्ष्मी को विधिवत आमंत्रित कर पूजा, अर्चना करने से मां लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करतीं हैं। परिवार में सुख, समृद्धि बढ़ती है।
ऐसे करें महालक्ष्मी का पूजन
- पूजा घर में चावल, गेहूं से स्वास्तिक बनाकर कलश स्थापित करें ।
- पीढ़े पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा विराजित करें।
- आंवला और आम पत्ता से तोरण, मंडप सजाएं।
- कटोरी में धान रखकर दीप प्रज्ज्वलित करें औश्र मां लक्ष्मी को आमंत्रित करें।
दिन में तीन बार पूजा का महत्व
गुरुवार को सूर्याेदय से पूर्व स्नान करके व्रत रखने का संकल्प लें। मुख्य द्वार पर दीप प्रज्ज्वलित करें। दोपहर 12 बजे चावल की खीर, अनरसा, बबरा, चावल का चीला आदि व्यंजनों का भोग लगाए शाम को पुनः पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारणा करें ।
पूजन की सामग्री
मां लक्ष्मी की पूजा में नारियल, केला, सिंघाड़ा, आंवला, बेर, सीताफल, धान की बाली का झालर, कुम्हड़ा, आंवला, पान, कपड़ा, टोकरी, प्याज, तेल, घी, शक्कर, चावल का उपयोग करें।
16 के आंकड़े का महत्व
अगहन गुरुवार पर लक्ष्मी पूजन में 16 के आंकड़े को विशेष महत्व दिया गया है। महिलाएं स्नान के दौरान 16 बार मुंह धोने की रस्म निभाएंगी। 16 लड़ वाली डोरी बनाकर केले पत्तों व आंवला से मंडप सजाकर दीप प्रज्ज्वलित करेंगी। दोपहर को केवल चावल से बने व्यंजन का भोग लगाकर शाम को आरती करके प्रसाद ग्रहण करेंगी।
वर्ष 2025 में अगहन माह के गुरुवार
पहला गुरुवार – 06 नवंबर अगहन कृष्ण प्रतिपदा तिथि
दूसरा गुरुवार – 13 नवंबर अगहन कृष्ण नवमीं तिथि
तीसरा गुरुवार – 20 नवंबर अगहन अमावस्या
चौथा गुरुवार – 27 नवंबर अगहन शुक्ल सप्तमी
पांचवा गुरुवार – 04 दिसंबर अगहन पूर्णिमा


