टीआरपी। biometric attendance : पिछले माह ही छत्तीसगढ़ के नए चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किए गए विकास शील ने अधिकारियों, कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने की घोषणा की थी। छत्तीसगढ़ में मंत्रालय में एक दिसंबर से बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू किया जाना है। इसमें चीफ सेक्रेटरी से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कर्मियों को बायोमेट्रिक अटेंडेंस का पालन करना है। पहले आईएएस, और मंत्रालय कैडर के अफसरों-कर्मियों को छूट मिली हुई थी।
अब आईएएस ने स्वयं को भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस के दायरे में लाया है। हालांकि इस आदेश का कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है। एक ओर छत्तीसगढ़ में चीफ सेक्रेटरी के आदेश का अधिकारी, कर्मचारी विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ओडिसा सरकार के ऐसे ही मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बायोमेट्रिक अटेंडेंस को सही करार दिया है।
मुख्यमंत्री कर चुके हैं तारीफ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक बैठक में चीफ सेक्रेटरी के बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के आदेश की प्रशंसा की है। यह आदेश लागू होने पर जो अधिकारी, कर्मचारी ऑफिस से नदारद रहते हैं, उनकी उपस्थिति सुनिश्चित हो सकेगी। अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि ऑफिस टाइम में अधिकारी, कर्मचारी नहीं मिलते। छोटे से कार्य के लिए कई बार ऑफिसों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने आपत्ति दर्ज कराई है, लेकिन इस आपत्ति से कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा और सरकार सभी कार्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस को कड़ाई से लागू करने पर जोर दे रही है।
कोर्ट का आदेश – बायोमेट्रिक अटेंडेंस हितकारी
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश में भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस का विरोध किया जा रहा है। पड़ोसी राज्य ओडिसा में तो महालेखाकार के अफसरों, और कर्मियों ने बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के सरकार के फैसले को अवैध बताया था। इसके विरोध में कर्मचारियों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। ओडिशा महालेखाकार में अक्टूबर-2013 से बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने का फैसला लिया था, इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इंस प्रकरण पर गत 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस पंकज मेथिल और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की पीठ ने संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आदेश में लिखा कि मामले के तथ्यों, और परिस्थितियों के मद्देनजर बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करना सभी हितधारकों के लाभ के लिए है।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर सहमत नहीं , अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन
अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन, बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के लिए सहमत नहीं है। फेडरेशन के अध्यक्ष कमल वर्मा का कहना है कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने से पहले रिक्त पदों पर भर्ती होनी चाहिए। सेट अप में स्वीकृत पदों के करीब 40 प्रतिशत पद खाली हैं। अधिकारी-कर्मचारी दिन-रात सरकार के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाते हैं।
वर्मा का कहना है कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस से कार्पाेरेट कल्चर को बढ़ावा मिलेगा। यह अधिकारी-कर्मचारियों के हित में नहीं है। इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।



