रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति कर्मचारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण धान खरीदी पर संकट मंडरा रहा है। दरअसल 15 नवंबर से प्रदेश में शुरू होने वाली धान खरीदी के पहले कर्मचारी संघ ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे प्रदेश की कई सहकारी समितियों में कामकाज ठप हो गया है l

प्रदेश भर में किसान अपने धान की कटाई मिसाइ में जुटे हुए हैं और मंडी खुलने का इंतजार कर रहे हैं l इधर सहकारी कर्मियों का आंदोलन 12 वें दिन भी जारी रहा।

चार सूत्रीय मांगों को लेकर 3 नवंबर 2025 से सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ रायपुर एवं आपरेटर संघ महासंघ रायपुर दोनों संगठन मांगों को लेकर निरंतर शासन पर ध्यान आकर्षण करने का प्रयास किया जा रहा है, परंतु सहकारिता एवं खाद्य विभाग के मंत्री अथवा सचिव ने महासंघ को वार्ता के लिए बुलावा नहीं भेजा है। धान खरीदी ऐसे में कैसे हो पाएगी, इस बात को लेकर सहकारी बैंक के अफसर चिंतित हैं।

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महासंघ के रायपुर जिला कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र साहू ने बताया कि धान खरीदी के काम में लगी समितियां घाटे में चली गई है। इस वजह से कर्मचारियों को समय में वेतन नहीं मिल रहा है।धान खरीदी में गड़बड़ी के कारण कर्मचारियों को जेल तक की हवा खानी पड़ी है और कोर्ट कचहरी जाते-जाते कई कर्मचारियों को शहीद भी होना पड़ा है। संघ का कहना है कि आज ख़रीदे हुए धान का समय पर परिवहन नहीं होना बहुत बड़ी समस्या है, जिससे किसानों की समिति को नुकसान हो रहा है और कर्मचारियों को 10 -12 महीने से तनख़ा नहीं मिल पा रही है। इससे पूर्व भी कर्मचारी आंदोलन कर चुके हैं, और सरकार मांगें पूरी करने का आश्वासन भी देती है, लेकिन अंततः वह मांग भी पूरी नहीं होती।

क्या है सहकारी कर्मियों की मांगें…

सहकारी महासंघ की पहली मांग है वेतन विसंगति दूर करना कर्मचारियों के वेतन में व्याप्त असमानताओं को दूर कर उचित वेतनमान लागू किया जाए। दूसरी मांग नियमितीकरण, संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाए। तीसरी मांग, पदोन्नति नीति लागू करना, कर्मचारियों के लिए स्पष्ट पदोन्नति नीति लागू की जाए। चौथी मांग, सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार, कर्मचारियों को बेहतर सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएं। इसके अलावा, कुछ अन्य मांगें भी हैं, जैसे कि धान खरीदी में 3% सूखत (धान के वजन में नमी के कारण कमी) को मान्य करना, मध्य प्रदेश की तर्ज पर सहकारी समितियों को प्रबंधकीय अनुदान देना, और संविदा ऑपरेटरों को नियमित करने की मांग संभाग स्तरीय कर रहे हैं

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धान खरीदी की नहीं हो पा रही व्यवस्था…

इस आंदोलन के कारण धान खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। केंद्रों में ताला लगने से किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता और सहकारी समितियों में कामकाज ठप पद गए हैं, जहां 2 दिन बाद केंद्रों में धान खरीदी शुरू होने वाली है और इधर केंद्रों में अभी तक साफ सफाई, ना ही भवनों की रंग रोगन एवं किसी प्रकार की तैयारी नहीं की गई है। वही कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे काम पर नहीं लौटेंगे। वहीं सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।