टीआरपी डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 5 हजार से ज्यादा पुराने सर्कुलर रद्द कर दिए हैं। आरबीआई के अनुसार ये सर्कुलर 1944 से लागू थे और वर्तमान बैंकिंग प्रणाली में इनकी उपयोगिता समाप्त हो चुकी थी। इसके साथ ही 9 हजार से अधिक सर्कुलर्स को समेकित कर 244 मास्टर गाइडलाइन में बदल दिया गया है।
डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मू ने जानकारी देते हुए बताया कि अब बैंकों को सभी आवश्यक नियम एक ही जगह उपलब्ध होंगे, जिससे कामकाज से जुड़े दिशानिर्देशों को समझना अधिक आसान होगा। इससे बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुव्यवस्था बढ़ने की उम्मीद है।
आम लोगों पर प्रभाव को लेकर मुर्मू ने बताया कि गवर्मेंट सिक्योरिटीज से जुड़े लोन संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है, जिसका असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। डिजिटल बैंकिंग के लिए भी सात नई मास्टर गाइडलाइन तैयार की गई हैं, जिनका प्रभाव बैंकों के साथ-साथ ग्राहकों तक पहुंचेगा।
आरबीआई अधिकारियों ने बताया कि 1944 से जारी हजारों सर्कुलरों की समीक्षा की गई, जिसके बाद अप्रासंगिक नियमों को हटाया गया और उपयोगी सर्कुलर्स को एकीकृत करके नई गाइडलाइन बनाई गई। यह पहली बार है जब इतनी व्यापक स्तर पर सर्कुलरों में बदलाव किए गए हैं।
आरबीआई ने अक्टूबर माह में 238 मास्टर गाइडलाइन का मसौदा जारी किया था। अब संशोधनों के बाद कुल 244 मास्टर गाइडलाइन लागू की गई हैं।



