टीआरपी। Mokshada Ekadashi Geeta Jayanti : हिदू पंचांग के 12 महीनों में पड़ने वाली 24 एकादशी का व्रत करने का अलग अलग महत्व है। इनमें से मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था। यह उपदेश श्रीमद भागवत गीता के रूप में प्रसिद्ध है। इसीलिए इस एकादशी के दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। इस वर्ष 2025 में मोक्षदा एकादशी यानी गीता जयंती 1 दिसंबर को मनाई जाएगी। मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन, व्रत करने से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है।

गीता का पाठ करें

मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती पर श्रीमद्भगवद्गीता का संपूर्ण पाठ करना चाहिए। यदि संपूर्ण पाठ न कर सकें तो 11वें अध्याय का पाठ अवश्य करना चाहिए।

गीता का दान करें

ब्राह्मण को भोजन कराकर श्रीमद्भगवद्गीता ग्रंथ का दान करें।

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मिश्री का भोग

भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल मिश्रित मिश्री का भोग लगाएं।

पूजा में स्थापित करें

पूजा घर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के साथ एक या तीन मोरपंख स्थापित करें।

पूजन विधि

मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के कपड़े पहनें। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें। पूजा में पीले फूल, फल, धूप, दीप और तुलसी पत्र जरूर शामिल करें। कठिन व्रत का पालन करें या फिर केवल फलाहार करें। अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर व्रत का पारण करें।