कांकेर। बस्तर के कांकेर जिले का प्रशासन इस बात को लेकर परेशान है कि सरोना तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत लेंडारा में कई आदिवासी परिवारों ने सरकारी योजनाओं से पूरी तरह दूरी बना ली है। सबसे गंभीर बात तो यह है कि SIR प्रक्रिया के दौरान जब प्रशासन की टीम ग्रामीणों के पास पहुंची तो उन्होंने फॉर्म लेने से ही इनकार कर दिया।इसकी वजह का भी खुलासा नहीं होने से प्रशासन की नींद उड़ गई है। अब अफसरों को भेजकर इसका पता लगाने की कोशिश की जाएगी।

नहीं कर रहे मतदान, राशन उठाना भी बंद किया

जानकारी के अनुसार, ये परिवार पिछले दो-तीन चुनावों से मतदान भी नहीं कर रहे हैं। पहले इनके नाम से राशन आता था, लेकिन उनके राशन न उठाने के कारण अब उनके कोटे का राशन भी आना बंद हो गया है। इसके अलावा दो परिवारों के लिए स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने से भी उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया है। ग्रामीण स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और बीएलओ सहित सभी अधिकारियों ने इन परिवारों को समझाने के कई प्रयास किए हैं।

कोई भी नहीं करता बातचीत

हालांकि, ये परिवार बातचीत करने को भी तैयार नहीं हैं। बीएलओ टीम को भी कई बार उनसे सीधे बात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है। गांव के राशन दुकान संचालक रामकुमार यादव ने बताया कि पहले चार परिवारों ने राशन लेने से मना कर दिया था, लेकिन इस महीने से अन्य परिवारों ने भी राशन नहीं लेने की बात कही है।

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ग्राम पंचायत के सचिव संतोष कुमार निषाद ने बताया कि शासकीय योजनाओं का विरोध करने की जानकारी मिलने के बाद गांव में बैठक आयोजित की गई। लेकिन ग्रामीण किसी भी प्रकार की जानकारी देने से मना कर देते हैं। अब स्थिति यह है कि वे आवास निर्माण कराने से भी इनकार कर रहे हैं।

काउंसलिंग का होगा प्रयास

पटवारी तुषार ठाकुर ने बताया कि ग्रामीणों को नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी कई बार दी गई है, लेकिन वे कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं। तहसीलदार सरोना एसके साहू ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी कल ही मिली है। ग्रामीण एसआईआर क्यों नहीं कराना चाहते, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

एसडीएम कांकेर अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि लेंडारा गांव के कुछ परिवार एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन अब काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें समझाने की तैयारी में है।

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इस संगठन का नाम आ रहा है सामने

ग्रामीणों का कहना है कि पहले ये परिवार गांव की हर गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल होते थे। पंचायत की बैठकों, सामाजिक आयोजनों और धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता रहती थी। मतदान में भी वे हिस्सा लेते थे। लेकिन कुछ समय पहले ‘भारत सरकार कुटुंब परिवार’ नामक संस्था से जुड़ने के बाद उनकी सोच कथित रूप से बदल गई। इसके बाद उन्होंने मतदान बंद कर दिया, परिवारों ने सरकारी राशन लेना छोड़ दिया और शासन की योजनाओं से दूरी बना ली। अब एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भी इन परिवारों ने बीएलओ से फॉर्म तक नहीं लिया, जिससे पूरा प्रशासन परेशान है।

क्या है ‘भारत कुटुंब परिवार..?’

इंटरनेट पर सर्च करें तो इस संस्था का नाम  “AC भारत सरकार कुटुंब परिवार” कहा जाता है। इससे जुड़े लोग अपने आपको भारत के मूल निवासी मानते हैं और मौजूदा सरकार को विदेशी मानते हैं। ये सभी सरकारी दस्तावेजों को नहीं रखते, मतदान नहीं करते, और सरकारी योजनाओं का बहिष्कार करते हैं। मौजूदा संविधान और कानूनों को नहीं मानते, और अपने नेता कुंवर केसरी सिंह को ही अपनी “असली सरकार” मानते हैं। 

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कुंवर केशरी सिंह केशरी के बारे में बताया जाता है कि उनका जन्म गुजरात के तापी जिले की व्यारा तहसील के कटास्वान गांव में हुआ। पिता का नाम टेटिया कानजी गामीथ था। कुंवर केशरी सिंह के अनुयायी उन्हें भारत की असली सरकार मानते हैं। ये लोग देवी-देवता को नहीं मानते। ये लोग खुद को भारत के किसी भी कानून का हिस्सा नहीं मानते हैं। अब इन्हीं कुंवर केशरी सिंह का बेटा रविंद्र गामीथ ‘AC भारत सरकार’ चलाता है और आदिवासियों को गुमराह कर खुद से जोड़ता है। इन्ही से जुड़कर लोग सरकारी तंत्र का बहिष्कार करते हैं।

इस मामले पर जिला कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने कहा कि लेंडारा के कुछ ग्रामीण शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं उठा रहे हैं और एसआईआर फॉर्म भी नहीं भर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में एसडीएम, तहसीलदार, बीएलओ और अन्य कर्मचारियों को भेजकर ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।