रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों में आरटीई में प्रवेश केवल कक्षा 1 में ही मिल सकेगा। इस संबंध में डीपीआई के 4 नवंबर के प्रस्ताव पर स्कूल शिक्षा विभाग ने मंजूरी दे दी है। उप सचिव नीलम टोप्पो ने डीपीआई को भेजे आदेश में कहा कि आरटीई की धारा 12 1 ग में संशोधन किया गया है। इसके मुताबिक राज्य में निजी विद्यालयों द्वारा कक्षा पहली में प्रवेश की मांग की थी। इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। सरकार के इस फैसले का RTE एक्टिविस्ट विकास तिवारी ने समर्थन किया है, तो वहीं निजी स्कूलों के संगठन ने विरोध किया है।
अब तक आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत एडमिशन मुख्य रूप से प्राइवेट स्कूलों की प्रवेश-स्तर की कक्षाओं (Entry-Level Classes) में होते रहे हैं, जो आमतौर पर नर्सरी (Nursery), KG-1, KG-2 या कक्षा 1 होती है, ताकि कमजोर वर्ग के बच्चों को पहली कक्षा से 8वीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा मिल सके।
निजी स्कूल संगठन को फैसले पर आपत्ति
छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सिर्फ कक्षा पहली में प्रवेश का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग के इस फैसले पर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इसके लिए एक बयान भी जारी किया है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा ?

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के अधिकार कानून में कक्षा पहली में प्रवेश देने का आदेश जारी हुआ है। यह आदेश शिक्षा के अधिकार कानून के उद्देश्यों के खिलाफ है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने बिंदुवार जानकारी दी है :
- बाल्यावस्था की शिक्षा (3–6 वर्ष) सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है, जहाँ भाषा, व्यवहार और सीखने की नींव रखी जाती है।
- आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग के बच्चे निजी स्कूलों में नर्सरी से पढ़ाई जारी रखेंगे, जबकि गरीब बच्चे सीधे कक्षा 1 में प्रवेश लेकर शैक्षणिक असमानता के शिकार होंगे।
- यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21-A (शिक्षा का अधिकार) की भावना के विपरीत है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी Foundational Education (3–8 वर्ष) को अत्यंत आवश्यक मानती है।
- यह निर्णय बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ाएगा और ड्रॉप-आउट की संभावना को बढ़ावा देगा
- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा RTE के तहत नर्सरी/एलकेजी/यूकेजी में प्रवेश समाप्त करना गरीब और वंचित बच्चों को पीछे धकेलने जैसा है।
- RTE का उद्देश्य समान अवसर देना है, न कि असमानता बढ़ाना।
- नर्सरी से प्रवेश बंद करना गरीब बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर कुठाराघात है।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन इस निर्णय का विरोध करता है।
बता दें कि RTE को लेकर कांग्रेस के युवा नेता और एक्टिविस्ट विकास तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है और हर सुनवाई में नई-नई चीजें सामने आ रही है। पिछली सुनवाई के बाद शिक्षा विभाग ने प्ले स्कूल के संचालकों को विभाग में अपना पंजीयन कराने का निर्देश दिया था, वहीं इस बार विभाग ने यह फैसला किया है कि प्रदेश में RTE याने शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों का प्रवेश पहली कक्षा से मिलेगा।

विकास तिवारी ने क्या कहा..?
RTE एक्टिविस्ट विकास तिवारी ने शिक्षा विभाग के इस फैसले का समर्थन किया है और कहा है कि इसका प्रदेश के जरूरतमंद बच्चों को भारी लाभ मिलेगा। विकास ने इस मामले में जारी बयान में कहा है कि “छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2012-13 से ग़रीब, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को निःशुल्क शिक्षा के हक़ में स्कूल शिक्षा विभाग के कथित रिश्वतखोर अधिकारियों और प्राइवेट स्कूल माफियाओ की मिलीभगत से लूटा जा रहा था। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रवींद्र अग्रवाल के प्रिंसिपल बैंच द्वारा लगातार इस जनहित, ग़रीब छात्रहित के विषय पर तल्ख़ फ़ैसला सुनाया जा रहा है, जिससे रिश्वतखोर अधिकारी और प्राइवेट स्कूल माफ़ियाओ के रातो की नींद उड़ी हुई है।
स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा जारी इस आदेश से स्पष्ट है कि लगातार पंद्रह सालों से ग़रीब, वंचित छात्रों का निःशुल्क शिक्षा का हक लूटा जा रहा था। अब रिश्वतखोर अधिकारियों द्वारा अपने आप को न्यायालय के कोपभाजन से बचाने के लिये इस आदेश को जारी किया गया है, जिसका विरोध अब प्राइवेट स्कूल माफिया कर रहे है। इन माफियाओ को स्कूल शिक्षा विभाग के रिश्वतखोर अधिकारियों द्वारा अपने आप को बचाने के लिये ये धोखा दिया गया है। जिसके कारण प्राइवेट स्कूल संचालकों में खलबली मच गयी है
विकास तिवारी ने कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के इस आदेश से स्पष्ट है कि मेरे द्वारा विगत दो वर्षों से जारी संघर्षों की सत्यता पर मुहर लगी है। विकास का दावा है कि इस फैसले से आने वाले सत्र में निःशुल्क शिक्षा की सीटो में तीन से चार गुना वृद्धि होगी, जिसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ राज्य के लाखों ग़रीब बच्चों को मिलेगा। इसके लिये पूरा प्रदेश मुख्य न्यायाधीश के प्रिंसिपल बैंच का आभारी रहेगा।


