कांकेर/भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बड़े तेवड़ा गांव में धर्मांतरित व्यक्ति के शव दफन को लेकर बवाल अब भी जारी है। गुस्साई भीड़ ने चर्च में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी। इसके अलावा सरपंच के घर में भी तोड़फोड़ की। इस दौरान आदिवासी और ईसाई समाज के बीच हिंसक झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान झड़प में अंतागढ़ एडिशनल एसपी आशीष बंसोड़ गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति को नियंत्रित किया। आज विरोध के तीसरे दिन आदिवासी समाज के लोगों ने आमाबेड़ा जाने वाले सभी रास्तों पर पेड़ काटकर और पत्थर रखकर उसे ब्लॉक कर दिया है।

दरअसल गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमराराम सलाम की रविवार को अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। सरपंच ने अपने पिता का कफन दफन गांव में ही कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और शव दफन को लेकर जमकर विरोध किया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद दोनों पक्षों में सहमति बनाने का प्रयास किया, लेकिन देर शाम तक कोई निर्णय नहीं हो पाया और ग्रामीण अपने घर लौट गए थे।

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विरोध के दौरान ग्रामीण और पुलिसकर्मी हुए घायल

बुधवार को मामला और गहरा गया। ग्रामीण धर्मांतरित व्यक्ति का शव कब्र से बाहर निकालकर दूसरे जगह अंतिम संस्कार की बात पर अड़े रहे। इस दौरान शव को निकालने की कोशिश भी की गई, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इस दौरान दोनों पक्षों में झूमाझटकी हुई। विरोध के दौरान कुछ ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों को चोट भी आई थी। गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस के तमाम अधिकारियों ने मोर्चा संभाला था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण में थी।

लाठी-डंडे से लैस होकर डटे हुए हैं ग्रामीण

गुरुवार को फिर आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को कब्र से निकालकर दूसरे जगह अंतिम संस्कार करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बता दें कि आदिवासी समाज दो फाड़ हो चुके हैं। दोनों में धर्मांतरण को लेकर आग जल रही है। एक तरफ मूल आदिवासी हैं जो धर्मांतरित आदिवासी परिवार के व्यक्ति के अंतिम संस्कार का विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर ईसाई परिवार है, जो अपने खेत में जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया है उसके शव को निकालने नहीं दे रहे हैं।

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प्रशासन ने कब्र से शव को निकाल कर बाहर भेजा

भारी विरोध के बीच प्रशासन ने शव को कब्र से निकालकर बाहर भेजा। अब भी हजारों ग्रामीण लाठी डंडे से लैस होकर गांव में डटे हुए हैं। भारी संख्या में पुलिस बल ने मोर्चा संभाल रखा है।

गांव के चारों ओर हुई नाकेबंदी

सरपंच के पिता का शव दफनाने को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। आज विरोध के तीसरे दिन आदिवासी समाज के लोगों ने आमाबेड़ा जाने वाले सभी रास्तों पर पेड़ काटकर और पत्थर रखकर उसे ब्लॉक कर दिया है।

आज आदिवासी समाज के लोगों ने विरोध करते हुए आमाबेड़ा जाने वाले सभी रास्ते ब्लॉक कर दिए हैं। आदिवासी समाज के लोगों ने सभी रास्तों पर पेड़ काटकर और पत्थर रखकर रोड को ब्लॉक कर दिया है। इसके अलावा वहां से किसी को भी आने-जाने नहीं दे रहे हैं। वहीं इस मामले में गांव के सरपंच (मृतक के बेटे) ने धर्मांतरित लोगों से गांव पहुंचकर साथ देने की अपील की है।

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