टीआरपी। Vinod Kumar Shukla : साहित्य के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार छत्तीसगढ़ की जिस शख्सियत को प्रदान किया गया। जिस हस्ती को मिले सम्मान की बदौलत पूरा छत्तीसगढ़ और प्रदेश की साहित्य बिरादरी का सिर गर्व से ऊंचा हुआ। अफसोस कि प्रदेश के वे महान साहित्यकार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल इन दिनों वेंटिलेटर पर हैं। देश के प्रसिद्ध अस्पतालों में से एक एम्स अस्पताल रायपुर में उनका इलाज चल रहा है और उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना साहित्य प्रेमी कर रहे हैं। शुक्ल से प्रेरणा लेने वाले और उनके चाहने वाले साहित्य प्रेमी इस बात से दुखी हैं कि एम्स जैसे सर्वसुविधायुक्त माने जाने वाले अस्पताल में उनका इलाज ढंग से नहीं किया जा रहा है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार शुक्ल से प्रेरणा लेने वालों में शामिल संकेत ठाकुर ने अपने फेसबुक पेज पर आक्रोशित होते हुए पीड़ा बयां की है कि वे एम्स अस्पताल की अव्यवस्था पर आक्रोशित हैं। वे दुखी मन से कहते हैं कि प्रदेश सरकार के नुमाइंदे, उच्च अधिकारी उनके इलाज की कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने फोन कर पूछा था हाल
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर रायपुर आए थे। तब उन्होंने विमान से उतरने के तुरन्त बाद फोन करके विनोद कुमार शुक्ल के स्वास्थ्य का हालचाल पूछा था। प्रधानमंत्री के फोन आने के बाद राज्य शासन के अधिकारियों में हलच मच गई थी। एक अधिकारी ने शुक्ल के बेटे शास्वत शुक्ल से कहा कि वे इलाज के लिए एक आवेदन पत्र भरकर जमा कर दें। एक स्वाभिमानी संवेदनशील साहित्यकार के पुत्र ने पिता के सम्मान की रक्षा करते हुए बड़़ी ही शालीनता से इलाज में सहायता हेतु राशि का आवेदन लिखने से इनकार कर दिया। शासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला और लगभग रु 4 लाख निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर खर्च करने के बाद उनके पुत्र शास्वत शुक्ल अपने पिता को लेकर 5 नवंबर को घर लौट आए।
घर पर दिया गया सर्वोच्च सम्मान
इसके पश्चात 21 नवंबर को शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो चुके विनोद कुमार शुक्ल को देश के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके घर पर ही साधारण कार्यक्रम में दिया गया। 3 दिसंबर को स्वास्थ्य फिर खराब होने लगा। श्वांस लेने में तकलीफ बढ़ी। इस बार निजी अस्पताल में हुए भारी खर्च को देखते हुए निजी की बजाय सरकारी अस्पताल एम्स रायपुर में उन्हें भर्ती किया गया। शुक्ल को एम्स रायपुर में भर्ती हुए 15 दिन हो गए हैं। अब, उन्हें वेंटिलेटर में शिफ्ट कर दिया गया है….
कर्मचारी नहीं, परिजन को करना पड़ रहा ड्रेसिंग, सफाई
शुक्ल के शिष्य ने सोशल मीडिया में इस बात को लेकर चिंता जताई है कि एम्स अस्पताल जिसे श्रेष्ठ अस्पताल माना जाता है, वहां अव्यवस्था से मरीज के परिजन परेशान हैं। जब इतने बड़े साहित्यकार की देखरेख ठीक ढंग से नहीं की जा रही है तो साधारण मरीज और उनके परिजनों पर क्या गुजरती होगी। अस्पताल का सिक्योरिटी गार्ड आवाज देखकर बुलाता है …. 1 नम्बर बेड के परिजन हाजिर हों। वहां जाकर बताया जाता है कि अपने पिता की ड्रेसिंग आप ही करो, बिस्तर की चादर बदलो, पिता का डायपर चेंज करो…आदि। कभी कभी रात को 12 बजे बुलाकर कहा जाता है कि बेड नंबर 1 के पेशेंट का बिस्तर से पैर बाहर आ गया है उसे अंदर करो। हॉस्पिटल के अन्य स्टाफ की लापरवाही की यह हालत है कि सफाई, टॉयलेट से लेकर हर काम के लिए मरीज के परिजनों को संघर्ष करना पड़ रहा है। जब, अस्पताल कर्मियों को उनकी ड्यूटी याद दिलाई गई तब परिजनों को यहां तक कह दिया गया कि आप स्वयं कोई निजी नर्सिंग स्टाफ ले आओ।
डॉक्टर भी कर रहे लापरवाही
देश के ज्ञानपीठ पुरस्कार से लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त साहित्यकार के इलाज में घनघोर लापरवाही पर उनके पुत्र शाश्वत कहते हैं कि दादा को सांस लेने की तकलीफ है लेकिन डॉक्टर उन्हें दूर से देखते हैं, या उनकी फोटो मोबाइल में देखकर दवा बताते है, ना कि छाती पर स्टेथोस्कोप लगाकर फेफड़े की हालत का अनुमान लगाते हैं। डाक्टर ने एक और टेस्ट कराने कहा जो एम्स में नहीं होता, इसके लिए किसी निजी लेब का शुल्क 25 हजार रुपये है।
राजनेता शर्म करें
शुक्ल का हालचाल पूछने अस्पताल गए संकेत ठाकुर प्रदेश सरकार और अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था से दुखी हैं। वे कहते हैं कि फोटो खिंचाने वाले राजनेताओं को यदि थोड़ी भी शर्म बची है तो वे अपने अधिकारियों को आदेश देकर डॉक्टर्स की टीम बनाकर हेल्थ चेकअप कराने में मदद करें, इलाज का समुचित प्रबंध करें, हेल्थ बुलेटिन जारी करें…और कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम फोटो खिंचवाने हॉस्पिटल ना जाएं।


