टीआरपी डेस्क। केंद्र की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा न तो मजबूत विपक्ष चाहती है और न ही स्वस्थ लोकतंत्र। उसका लक्ष्य कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों को राजनीतिक रूप से समाप्त करना है। नेशनल हेराल्ड मामला इसकी सबसे बड़ी मिसाल है, जहां जांच एजेंसियों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया।

रायपुर स्थित राजीव भवन में आयोजित कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शशिकांत सेंथिल ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मंत्री शिव डहरिया, पूर्व मंत्री प्रेम साय सिंह टेकाम समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बता दे कि शशिकांत सेंथिल तमिलनाडु से सांसद है।

सेंथिल ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत द्वारा उठाए गए सवालों से यह स्पष्ट हुआ कि बिना किसी ठोस अपराध के आरोप लगाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक निजी शिकायत के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की गई और बिना प्रत्यक्ष आपराधिक लेन-देन के पीएमएलए जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना था कि यह विपक्ष को डराने और दबाने की रणनीति का हिस्सा है। ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की सोच को दर्शाता है।

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प्रेस वार्ता में उन्होंने मनरेगा योजना में किए गए बदलावों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की मूल भावना को ही खत्म किया जा रहा है। यह योजना ग्रामीण मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की आधारशिला थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसे धीरे-धीरे कमजोर किया गया है।

उन्होंने बताया कि पहले मनरेगा पूरी तरह मांग आधारित योजना थी, जिसमें राज्यों की मांग के अनुसार काम उपलब्ध कराया जाता था। अब इसे सीमित बजट वाली योजना बना दिया गया है, जिसके चलते पंचायत स्तर पर मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है और बजट की कमी बताकर उन्हें लौटाया जा रहा है।

सेंथिल ने आरोप लगाया कि 60:40 जैसे नए प्रावधान लागू कर खेती के सीजन में रोजगार के अवसर सीमित किए जा रहे हैं। साथ ही अब यह तय करने का अधिकार भी केंद्र अपने पास रख रहा है कि किस राज्य में मनरेगा का काम चलेगा और किसमें नहीं। उन्होंने इसे संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया।

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कांग्रेस सांसद ने कहा कि पार्टी इन फैसलों के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी। उन्होंने दावा किया कि जैसे केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, उसी तरह मनरेगा से जुड़े जनविरोधी फैसलों को भी वापस लेना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार मजदूरों को कमजोर समझने की भूल कर रही है, जबकि वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर लड़ना जानते हैं।