रायपुर। हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने जल–जंगल– जमीन, जैव विविधता और पर्यावरण की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। समिति की ओर से 16 जनवरी 2026 को अंबिकापुर के बीटीआई ग्राउंड में विशाल रैली और आमसभा आयोजित की जाएगी। यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शुरू होगा।

संघर्ष समिति की ओर से आलोक शुक्ला ने एक प्रेस नोट में कहा कि सरगुजा संभाग के हसदेव, मैनपाट, सामरी पाट, ओड़गी, भैयाथान, वाड्रफनगर, तातापानी, प्रेमनगर और आसपास के इलाकों में प्रस्तावित और प्रक्रियाधीन खनन परियोजनाओं से पर्यावरण पर भारी खतरा मंडरा रहा है। कोरिया से लेकर रायगढ़ तक 50 से अधिक कोयला, बॉक्साइट, लिथियम और ग्रेफाइट की खदानें प्रस्तावित हैं, जिनसे लाखों हेक्टेयर जंगल खत्म होने की आशंका है।

समिति ने चेताया है कि बड़े पैमाने पर हो रहे खनन से नदियों का जलस्तर गिर रहा है, जंगल सिमटते जा रहे हैं और जैव विविधता तेजी से नष्ट हो रही है। जलवायु परिवर्तन के असर से तापमान बढ़ रहा है और बाढ़, सूखा, असमय बारिश जैसी आपदाएं आम होती जा रही हैं। हाल ही में संसद में पेश एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि कोयले की धूल से फेफड़ों की गंभीर बीमारियां और कैंसर जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

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हसदेव बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि हसदेव अरण्य, जिसे छत्तीसगढ़ का फेफड़ा कहा जाता है, उसके विनाश से मिनीमाता हसदेव बांगो बांध के अस्तित्व पर भी खतरा बताया गया है। जंगल कटने से हाथी-मानव संघर्ष बढ़ा है और कई लोगों की जान जा चुकी है। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने भी चेतावनी दी है कि खनन से हाथी गलियारों पर स्थायी असर पड़ेगा, जिसे भविष्य में संभालना मुश्किल होगा।

संघर्ष समिति का कहना है कि खनन विस्फोटों के कारण रामगढ़ पहाड़ जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल पर दरारें पड़ रही हैं। नई केते एक्सटेंशन कोयला परियोजना से लाखों पेड़ कटने की आशंका है, जिससे सीता भेंगरा जैसी ऐतिहासिक नाट्यशालाओं का अस्तित्व भी खतरे में है।

आरोप लगाया गया है कि ग्रामसभाओं की सहमति के बिना, पेसा कानून और वनाधिकार कानून की अनदेखी कर खनन परियोजनाओं को मंजूरी दी जा रही है। कई गांवों में ग्रामसभा प्रस्तावों को फर्जी बताया गया है, फिर भी जबरन पेड़ कटाई और भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है।
हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने लोगों से अपील की है कि वे 16 जनवरी की रैली और आमसभा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर सरगुजा और पूरे छत्तीसगढ़ के भविष्य को बचाने में अपनी भागीदारी निभाएं।  

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