टीआरपी डेस्क। कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के खिलाफ हुई प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने आई-पैक के कोलकाता स्थित कार्यालय पर हुई रेड के मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी जांच एजेंसी के काम में इस तरह का दखल स्वीकार्य नहीं है।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की याचिका में उठाए गए सवालों को गंभीर बताते हुए कहा कि इन पर स्पष्ट जवाब जरूरी है। इसके साथ ही अदालत ने छापेमारी के दौरान हुई घटनाओं से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य के डीजीपी समेत अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि पूरे मामले की जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं राज्य की कानून व्यवस्था की आड़ में किसी को संरक्षण तो नहीं दिया जा रहा।

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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को भी निर्देश दिया है कि आई-पैक कार्यालय में लगी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। ईडी की याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख तीन फरवरी तय की गई है।

दरअसल, यह पूरा मामला आठ जनवरी की छापेमारी से जुड़ा है, जब कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में ईडी ने साल्टलेक स्थित आई-पैक के दफ्तर और उसके निदेशक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर छापा मारा था। ईडी का आरोप है कि इस दौरान उसके अधिकारियों को जांच में बाधा पहुंचाई गई और हालात तनावपूर्ण हो गए।

केंद्रीय जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और जबरन परिसर में दाखिल हुईं। ईडी का आरोप है कि इस दौरान जांच से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज भी साथ ले जाए गए। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए ईडी पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

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