टीआरपी। Gupt Navratri : हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व, त्यौहारों में से नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि में शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा देवी की पूजा, अनुष्ठान की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि देवी दुर्गा के पूजन से परिवार में सुख, समृद्धि बढ़ती है और साधक पर मां की विशेष कृपा होती है। वैसे तो एक वर्ष में चार नवरात्रि पर्व मनाने का विधान है। लेकिन, इनमें से दो नवरात्रि गुप्त रूप से मनाई जाती है। मंदिरों में गुप्त रूप से माता का अनुष्ठान संपन्न होता है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा होती है। 10 महाविद्याओं में मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला का पूजन गुप्त रूप से किया जाता है।
दो सार्वजनिक और दो गुप्त नवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह और आश्विन माह की नवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती है। मंदिरों में दर्शन, पूजन करने हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मनोकामना जोत का प्रज्वलन किया जाता है। वहीं, माघ और आषाढ़ महीने में गुप्त रूप से नवरात्रि मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि में मंदिरों में श्रद्धालुओं की मनोकामना जोत प्रज्वलित नहीं की जाती। श्रद्धालु, गुप्त रूप से माता की आराधना करते हैं।
19 जनवरी से गुप्त नवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 में गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होकर 27 जनवरी तक चलेगी। खास बात यह है कि गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ सर्वार्थसिद्धि योग से हो रहा है और समापन भी 27 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के संयोग के साथ होगा।
शुक्र अस्त होने पर भी शुभ संस्कार होंगे
ऐसी मान्यता है कि शुक्र ग्रह के अस्त होने पर शुभ संस्कार नहीं किए जाते। लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में शुक्र अस्त होने पर भी शुभ संस्कार किए जा सकेंगे।
शुभ मुहूर्त
माघ मरह की गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी को प्रतिपदा तिथि से शुरू हो रही है। प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी से 20 जनवरी को दोपहर 2.14 बजे तक रहेगी। उदयातिथि का महत्व होने के चलते 19 जनवरी को सुबह गुप्त नवरात्रि पर घट स्थापना, पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।
वज्र योग का संयोग
19 जनवरी को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। मध्यान्ह काल में अभिजीत मुहूर्त के समय सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा। इस योग में साधना, आराधना करना शुभ होता है। की शुरुआत करने से यह शीघ्र फलित होती है।
तारीख शुभ योग
19 जनवरी कुमार योग, सर्वार्थ सिद्धि योग
20 जनवरी द्विपुष्कर योग, राजयोग
21 जनवरी राजयोग, रवि योग
22 जनवरी रवि योग
23 जनवरी कुमार योग, रवि योग
24 जनवरी रवि योग
25 जनवरी रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग
27 जनवरी सर्वार्थ सिद्धि योग



