कवर्धा। कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में 218 करोड़ रूपये के घोटाले में जिस BEO पर आरोप लग रहे हैं , उन्होंने सारी बातों को निराधार बताते हुए कहा कि पूरी रकम शिक्षकों के वेतन की है, जिसे बाकायदा भुगतान किया गया है। उनके कार्यालय के बाबू की मनमानी के चलते दस्तावेजों का संधारण नहीं हो सका था, जिसे उन्होंने नोटिस मिलने के बाद दूसरे बाबू की मदद से दुरुस्त करवा दिया है।

दरअसल जिला शिक्षा अधिकारी, कबीरधाम की ऑडिट टीम ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि बीते तीन सालों में कोषालय से निकाले गए करीब 218 करोड़ रुपये के लेन-देन के कैश बुक, वाउचर और बिल रजिस्टर गायब पाए गए हैं, जिसके बाद तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) संजय जायसवाल पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए।

अब इस पूरे मामले में पूर्व बीईओ संजय जायसवाल का पक्ष भी सामने आया है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने बताया कि सभी रकम शिक्षकों के वेतन की है और उनके कार्यकाल में शिक्षकों का वेतन नियमित रूप से भुगतान किया गया तथा सभी बिल, वाउचर, कैश बुक सहित वित्तीय दस्तावेज 11 दिसंबर 2025 को वर्तमान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दिए गए हैं , जिसकी पावती उनके पास मौजूद हैं।

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बाबू की मनमानी का मिल रहा खामियाजा

पूर्व बीईओ संजय जायसवाल ने बताया कि उनका कार्यकाल अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 तक तीन वर्षों का ही रहा। इस दौरान कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप लेखा-जोखे को दुरुस्त नहीं किया। उन्हें मौखिक और लिखित दोनों तरीके से आवश्यक निर्देश दिए गए, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद उन्होंने दस्तावेजों का संधारण ठीक से नहीं किया। इसी लापरवाही के कारण कई वित्तीय अभिलेख अधूरे रह गए। कक्ष प्रभारी को नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। यहां तक कि उन्हें निलंबित करने के लिए विभाग प्रमुख को पत्र लिखा तब बाबू के खिलाफ जांच का जिम्मा यू आर चंद्राकर को सौंपा गया, मगर अब तक कोई भी जांच नहीं की गई।

BEO और DEO को दे दी थी पूरी जानकारी

संजय जायसवाल का दावा है कि उनके कार्यकाल में किसी भी प्रकार का गबन नहीं हुआ है और उनके पास हर लेन-देन से जुड़े साक्ष्य मौजूद हैं। स्थानांतरण के समय उन्होंने पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को भी दे दी थी। वर्तमान में जब ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद 19 जनवरी 2026 को उन्हें नोटिस मिली तब उससे काफी पहले उन्होंने दूसरे स्टाफ को लगाकर दस्तावेजों को पूरा कराया और उन्हें 11 दिसंबर 2025 को ही BEO और DEO को सौंप दिया है। आज जब DEO रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कह रहे हैं, तब ऐसा लग रहा है कि DEO को उनके कार्यालय के स्टाफ जानकारी नहीं दे रहे हैं। इस स्टाफ के ऊपर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

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गौरतलब है कि एक दिन पहले ही इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एफ.आर. वर्मा ने बताया था कि ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। ऑडिट में कुछ कमियां सामने आई हैं, जिनके संबंध में तत्कालीन अधिकारी से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। उनका जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी, जबकि पूर्व BEO का कहना है कि उन्होंने अपना स्पस्टीकरण दस्तावेजों के साथ सौंप दिया है।