टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की प्रक्रिया 30 जनवरी को पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके साथ ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार से उन किसानों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है जो निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना धान नहीं बेच पाए हैं।
भूपेश बघेल ने अपने पत्र में चिंता जताते हुए कहा कि शासन लक्ष्य प्राप्ति के दावे कर रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही सूचनाएं अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि खरीदी बंद होने के बाद विशेष रूप से वे किसान भारी आर्थिक दबाव में हैं जिन्होंने खेती के लिए कर्ज लिया था। उन्होंने सरकार से पूछा कि जो किसान धान नहीं बेच पाए हैं, उनसे कर्ज की वसूली को लेकर शासन की क्या नीति है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से कई बिंदु उठाए हैं, जिनमें इस वर्ष के लिए निर्धारित कुल लक्ष्य, लक्ष्य के विरुद्ध हुई वास्तविक खरीदी और पंजीकृत किसानों की तुलना में लाभान्वित किसानों की संख्या की जानकारी मांगी गई है। उन्होंने एग्रीस्टैक पोर्टल में आई तकनीकी खामियों का भी जिक्र किया, जिसके कारण कई किसानों का रकबा कम या शून्य प्रदर्शित हुआ और वे अपनी फसल नहीं बेच सके। बघेल ने पूछा कि ऐसे किसानों की आर्थिक क्षति की भरपाई सरकार कैसे करेगी।
पत्र के अंत में उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अन्नदाता के स्वाभिमान की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इन बिंदुओं पर वस्तुस्थिति स्पष्ट की जाए और किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लिए जाएं ताकि कोई भी किसान ऋण के बोझ तले न दबे।


