रायपुर। प्रदेश में सरकारी अस्पतालों को आउटसोर्स करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसकी शुरूआत बस्तर से की गई है। पहले सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी की मशीनें और रीजेंट निजी कंपनियों से लिए जाते थे, अब पूरे अस्पताल का संचालन ही निजी संस्थाओं को सौंपा जा रहा है।

बस्तर के लोगों के लिए 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कभी उम्मीद की बड़ी वजह था। सरकार ने दावा किया था कि यहां दिल, किडनी, न्यूरोलॉजी जैसे गंभीर रोगों का इलाज सरकारी दरों पर मिलेगा और मरीजों को रायपुर या हैदराबाद जैसे शहरों की महंगी यात्रा से राहत मिलेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट सामने आ रही है।

करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस सरकारी अस्पताल का संचालन हैदराबाद के निजी स्वास्थ्य समूह कॉन्टिनेंटल को सौंपा गया है। भवन, मशीनें और पूरा बुनियादी ढांचा सरकारी पैसे से तैयार किया गया, लेकिन अब अस्पताल में निजी अस्पतालों जैसी दरें वसूली जा रही हैं। ओपीडी पर्ची के नाम पर 450 रुपये और एमआरआई जैसे टेस्ट के लिए 9 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। मरीजों का कहना है कि यह सरकारी अस्पताल को निजी हाथों में बेच देने जैसा है।

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बिना मंजूरी जारी कर दी गई रेट लिस्ट

सबसे गंभीर बात यह है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अफसरों से किसी तरह की मंजूरी लिए बिना ही इलाज और जांच की रेट लिस्ट जारी कर दी गई। जिन अधिकारियों पर दरों की निगरानी की जिम्मेदारी है, उन्हें भी इन रेट्स की जानकारी नहीं है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना इलाज शुरू

सरकार और निजी ऑपरेटर ने दावा किया था कि कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कैंसर, गंभीर सर्जरी, 24 घंटे आईसीयू, ओपीडी और आपात सेवाएं उपलब्ध होंगी। लेकिन कई विभाग अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थायी तैनाती नहीं हुई है और ओपीडी में भी विशेषज्ञों की कमी है। नतीजा यह है कि महंगी मशीनों और इमारत के बावजूद मरीजों को विशेषज्ञ इलाज नहीं मिल पा रहा, लेकिन शुल्क पूरे वसूले जा रहे हैं।

आयुष्मान और CGHS में रजिस्ट्रेशन नहीं

कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन अभी तक सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम या आयुष्मान भारत में नहीं हुआ है। तय यह था कि इलाज की दरें CGHS या आयुष्मान में से जो कम होंगी, वही लागू की जाएंगी। बस्तर जैसे पिछड़े क्षेत्र के लिए अतिरिक्त रियायत की भी बात कही गई थी। नियम के मुताबिक रेट सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर तय होने थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अफसरों को दरकिनार कर खुद ही दरें तय कर दीं।

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बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, जो मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने रेट तय होने की जानकारी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यदि बिना अनुमति दरें तय की गई हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।