टीआरपी डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से अमेरिकी बाजार को लेकर असमंजस में रहे एक्सपोर्टर्स को अब नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद जगी है। कई निर्यातक गर्मियों के लिए कंटेनर भेजने के बाद अगले सीजन के ऑर्डर को लेकर चिंतित थे, लेकिन नई डील ने तस्वीर बदल दी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद पिछले कुछ महीनों में छोटे निर्यातकों ने शिपमेंट लगभग रोक दिया था। कुछ बड़े निर्यातक नुकसान सहकर भी निर्यात जारी रखे हुए थे। अब 18 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद एक बार फिर प्रतिस्पर्धी स्थिति में आ गए हैं।

बांग्लादेश और श्रीलंका से सस्ता भारत का कपड़ा

भारतीय कपड़ों पर लगने वाला टैक्स बांग्लादेश और श्रीलंका की तुलना में कम है। जहां इन दोनों देशों के कपड़ों पर अमेरिका में 20 प्रतिशत टैक्स लगाया जा रहा है, वहीं भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ तय किया गया है। इससे कपड़ा निर्यात को सीधा फायदा मिलेगा। कालीन सेक्टर में भारत का मुकाबला तुर्किए से है, जबकि भारतीय झींगा भी अब अमेरिकी बाजार में ज्यादा किफायती होगा।

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जेम्स और ज्वेलरी निर्यातकों के लिए भी यह डील फायदेमंद मानी जा रही है। अमेरिकी बाजार में चीनी उत्पादों पर 34 प्रतिशत टैरिफ के मुकाबले भारत पर कम टैक्स होने से भारतीय ज्वेलरी की मांग बढ़ने की संभावना है। हालांकि ऑटो पार्ट्स और मेटल जैसे कुछ सेक्टर्स पर सेक्टोरल टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे।

इन सेक्टर्स पर नहीं पड़ा असर

आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से नवंबर के बीच अमेरिका को भारत का निर्यात 11.3 प्रतिशत बढ़कर 59 बिलियन डॉलर पहुंच गया। इस दौरान स्मार्टफोन शिपमेंट दोगुना होकर 16.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ का असर इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा समेत भारत के करीब 40 प्रतिशत निर्यात पर नहीं पड़ा।

यूके और यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील साइन कर भारत ने अपने निर्यात बाजारों में विविधता भी बनाई है, जिससे भविष्य में किसी एक देश की नीतियों पर निर्भरता कम होगी। हालांकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों पर अब तक भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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