US India Trade Deal: भारत और अमेरिका आखिरकार व्यापार समझौते (Trade Deal) पर सहमत हो दिए हैं. इसके तहत ट्रंप सरकार ने पारस्परिक टैरिफ (आयात शुल्क) को पिछले 25% से घटाकर 18% कर दिया है. वहीं रूस के साथ तेल व्यापार के चलते लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. इस तरह कुल मिलाकर देखा जाए तो टैरिफ में 32% की राहत मिली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह व्यापार समझौता ‘तत्काल प्रभाव से लागू’ होगा, जो भारत के लिए टैरिफ में तत्काल राहत का संकेत है.
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच 2 फरवरी को हुआ व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए एक गेम चेंजर साबित होने वाला है। इस समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% के स्तर से घटाकर मात्र 18% करने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत करते हुए इसे 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया। यह समझौता न केवल व्यापारिक दूरियों को कम करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय गुड्स को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
एशियाई प्रतिद्वंद्वियों पर भारत की रणनीतिक बढ़त
इस नई टैरिफ दर ने भारत को उसके निकटतम पड़ोसी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले एक बड़ी बढ़त दिला दी है।
जहां भारत अब 18% शुल्क का सामना करेगा, वहीं वियतनाम, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे बड़े निर्यातक देशों को 20% टैरिफ देना होगा। यहां तक कि पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों पर भी 19% का शुल्क लागू है। यह 1-2% का अंतर भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय निर्यातकों को कीमत के मोर्चे पर एक बड़ा लाभ देगा, जिससे टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत की पकड़ मजबूत होगी।
India-US Trade Deal: कार से लेकर कपडों तक, टैरिफ में 32% की राहत से भारत के किन सेक्टर्स को होगा बड़ा फायदा?
भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता हुआ है. राष्ट्रपति ट्रंप ने आयात शुल्क 25% से घटाकर 18% कर दिया है, जबकि रूस से तेल व्यापार के चलते लगाया गया 25 फीसदी टैक्स खत्म किया जाएगा। जानें इस फैसले से किन सेक्टर्स को ज्यादा फायदा होगा
अमेरिकी ट्रेड टैरिफ में ये ढील भारत के कई निर्यात-उन्मुख (Export-oriented) सेक्टर्स के लिए फायदेमंद है. बता दें कि इससे पहले, 27 अगस्त से 50% तक के कड़े टैरिफ लागू हो गए थे, जिससे लागत का दबाव बढ़ गया था और अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की मांग कम हो गई थी. अब टैरिफ कम होने से, जिन कंपनियों का अमेरिका में बड़ा एक्सपोजर है, उन्हें मार्जिन में राहत, बेहतर कॉम्पिटिटिवनेस और ऑर्डर्स की स्पष्टता मिलने की उम्मीद है. भारतीय निर्यातकों में खासतौर से टेक्सटाइल, सीफूड, ऑटो एंसिलरी, केमिकल्स और कुछ चुनिंदा कंज्यूमर कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है.
टेक्सटाइल और अपैरल (Textile & Apparels)
- इंडो काउंट इंडस्ट्रीज (Indo Count Industries)
- काइटेक्स (Kitex)
- गोकलदास एक्सपोर्ट्स (Gokaldas Exports)
- पर्ल ग्लोबल (Pearl Global)
- वेलस्पन इंडिया (Welspun India)
- हिमात्सिंका साइड (Himatsingka Seide)
- ट्राइडेंट (Trident)
- वर्धमान टेक्सटाइल्स (Vardhman Textiles)
- अरविंद (Arvind)
सीफूड सेक्टर (Seafood Sector)
- एपेक्स फ्रोजन फूड्स (Apex Frozen Foods)
- वॉटरबेस (Waterbase)
- अवंती फीड्स (Avanti Feeds)
ऑटो और ऑटो पार्ट्स (Auto & Auto Ancillaries)
- सोना बीएलडब्ल्यू (Sona BLW)
- रामकृष्ण फोर्जिंग (Ramkrishna Forging)
- भारत फोर्ज (Bharat Forge)
- टाटा मोटर्स (Tata Motors)
- संवर्धन मदरसन (Samvardhana Motherson)
- बालकृष्ण टायर्स (Balkrishna Tyres)
- सनसेरा इंजीनियरिंग (Sansera Engineering)
केमिकल और एग्रोकेमिकल (Chemicals)
- यूपीएल (UPL)
- एसआरएफ (SRF)
- जुबिलेंट इनग्रेविया (Jubilant Ingrevia)
- आरती इंडस्ट्रीज (Aarti Industries)
- पीआई इंडस्ट्रीज (PI Industries)
कंज्यूमर गुड्स (Consumer Companies)
- एलटी फूड्स (LT Foods – Daawat)
- केआरबीएल (KRBL – India Gate)
- टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products)



