टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल में जारी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में हाई-प्रोफाइल सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोर्ट रूम में मौजूद रहीं और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की अनुमति से अपनी बात रखी। ममता बनर्जी ने भावुक दलीलें देते हुए कहा कि राज्य में इंसाफ नहीं मिल रहा है और वे अपनी पार्टी के लिए नहीं बल्कि जनता के हक के लिए लड़ रही हैं।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने का लगाया आरोप

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर का उद्देश्य नाम जोड़ना नहीं बल्कि वोट डिलीट करना है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ममता बनर्जी ने तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही। उन्होंने बताया कि आधार कार्ड के बावजूद अतिरिक्त प्रमाण पत्रों की मांग की जा रही है, जिससे गरीब और प्रवासी लोग परेशान हो रहे हैं।

See also  बिलासपुर के बिलासा ताल रेत घाट में मुंशी की निर्मम हत्या, पुलिस के शक की सुई रेत माफियाओं पर

कोर्ट की टिप्पणी और चुनाव आयोग को नोटिस

इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान जब मुख्यमंत्री ने खुद पैरवी की, तो कोर्ट ने उन्हें टोकते हुए कहा कि उनके पास दिग्गज वकीलों की टीम मौजूद है। हालांकि, कोर्ट ने आश्वस्त किया कि समाधान निकालने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि किसी निर्दोष का नाम वोटर लिस्ट से न छूटे। अदालत ने स्पष्ट किया कि 10 दिन की डेडलाइन पहले ही बढ़ाई जा चुकी है, जिसे अब और आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

32 साल बाद कोर्ट में दिखीं ‘वकील’ ममता

कानून स्नातक (LLB) की डिग्री रखने वाली ममता बनर्जी 32 साल बाद किसी अदालती कार्यवाही में सक्रिय रूप से शामिल हुईं। इससे पहले 10 फरवरी 1994 को उन्होंने एक जिला अदालत में बतौर वकील आखिरी बार केस लड़ा था और 33 लोगों को जमानत दिलाई थी। आज मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने उनकी याचिकाओं पर सुनवाई की।

See also  कोरोना वैक्‍सीन पर अच्छी खबर, ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी वाली ट्रायल के आखिरी दौर में

क्या है विवाद?

राज्य में लगभग 1.25 करोड़ वोटर्स ‘लॉजिकल विसंगतियों’ की सूची में शामिल हैं। इसमें माता-पिता के नाम में बेमेल और उम्र के अंतर जैसी तकनीकी खामियां हैं। ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की है।