जगदलपुर। बस्तर की जनता को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर बनाए गए बस्तर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में जनता से निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों के समान फीस वसूली जा रही है। करीब 200 करोड़ रुपये की सरकारी लागत से तैयार इस अस्पताल के मनमाने फीस से आम मरीज और ग्रामीण जनता परेशान है। इस मुद्दे पर बस्तर के कांग्रेसियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
निजी संस्था को संचालन की जिम्मेदारी
जगदलपुर से लगे डिमरापाल में बने इस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का संचालन हैदराबाद की कॉन्टिनेंटल नामक निजी स्वास्थ्य संस्था को सौंपा गया है। सरकार की मंशा थी कि यहां इलाज सरकारी दरों पर होगा, ताकि बस्तरवासियों को रायपुर, हैदराबाद और विशाखापट्टनम जैसे बड़े शहरों में महंगे इलाज और यात्रा से राहत मिल सके, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।

ओपीडी की फीस 450 रु, एमआरआई का शुल्क 9000
अस्पताल में ओपीडी रजिस्ट्रेशन के नाम पर 450 रुपये और एमआरआई जांच के लिए लगभग 9 हजार रुपये तक की फीस ली जा रही है। मरीजों का आरोप है कि सरकारी भवन और संसाधनों में संचालित यह अस्पताल निजी संस्थान की तरह मनमानी कर रहा है। महंगे शुल्क के कारण दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज कराने आने वाले मरीजों को भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है.
महंगी फीस के खिलाफ कांग्रेस का धरना
बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के द्वारा डिमरापाल सुपर स्पेशलिस्ट कॉन्टिनेंटल अस्पताल के द्वारा बस्तर की जनता को बेहतर सुविधाओं के नाम अत्यधिक शुल्क व अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम व अस्पताल प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा गया है । शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा बस्तर की जनता को सुविधाओं के नाम पर लूटना कांग्रेस पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। डिमरापाल स्थित कॉनटीनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के बस्तर की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर निजी प्रबंधन द्वारा उनका आर्थिक शोषण का कांग्रेस पुरजोर विरोध करती है।
उन्हाेने कहा वर्ष कि 2019-20 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने केंद्र की इस परियोजना में 40 प्रतिशत राशि इसी शर्त पर दी थी कि यहां बस्तरवासियों को मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर सस्ती चिकित्सा सुविधाओ का लाभ मिलेगा, लेकिन अब इस वादे को वर्तमान में दरकिनार किया जा रहा है। एनएमडीसी स्टील द्वारा इस अस्पताल के संचालन हेतु प्रतिवर्ष 53 करोड़ रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। जब ज़मीन, भवन और उपकरण शासकीय हैं और संचालन हेतु बड़ी राशि एनएमडीसी दे रहा है, तो प्रबंधन द्वारा 900 रुपये ओपीडी शुल्क और महंगी जंच दरें वसूलना पूरी तरह अनुचित है। सरकार और अस्पताल प्रबंधन के बीच हुए संचालन अनुबंध (एमओयू) की शर्तों को सार्वजनिक किया जाए ताकि जनता को उनके अधिकारों का पता चल सके।
अब बढ़ा दी गई ओपीडी की फीस
अस्पताल ने 23 जनवरी को बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के ट्रायल शुरू किया, तब ओपीडी शुल्क 450 बताया गया था। अब 4 फरवरी को नोटिस जारी कर सीजीएचएस दरों का हवाला देते हुए इसे 900 रूपये कर दिया गया है। प्रबंधन का यह दोहरा रवैया अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जो शुल्क वो ले रहे है वो सीजीएचएस के मापदंड के अनुसार है। चूंकि सीजीएचएस योजना मुख्यतः केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के लिए होती है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस योजना का हवाला देना बस्तर की सामान्य जनता के लिए केवल भ्रम की स्थिति पैदा करना है। क्या अस्पताल प्रबंधन यहां के हर नागरिक का सीजीएचएस कार्ड बनवाएगा? यदि नहीं,तो आम जनता को इस योजना के नाम पर ठगा जाना बंद हो!
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कांग्रेस की मांग है कि एनएमडीसी से मिल रहे करोड़ों रुपये के अनुदान को देखते हुए यहां मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की दरों पर ही सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बस्तर की गरीब जनता के नाम पर आबंटित संसाधनों का लाभ किसी निजी कंपनी के मुनाफे के लिए नहीं होने दिया जाएगा । अतःजनहित में हस्तक्षेप करते हुए तत्काल शुल्क में कटौती की जाए और पूर्व समझौतों के अनुरूप सस्ती चिकित्सा सुनिश्चित की जाए। अगर जल्द से जल्द यह नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी उग्र प्रदर्शन करने हेतु पूर्ण रूप से बाध्य होगी।


