टीआरपी। राजिम कुंभ कल्प मेले में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करते हुए पाटेश्वर सेवा संस्थान के बाल योगेश्वर राम बालक दास महायोगी ने कुंभ कल्प को देश का पांचवा सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक समागम बताया है। संगम तट पर आयोजित हनुमत महायज्ञ में आहुति देते हुए उन्होंने “सर्वे भवंतु सुखिन:” के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
राजिम कुंभ न केवल तीन नदियों का संगम है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान और हिंदू समाज की एकता का प्रतीक है। महायोगी द्वारा बताए गए माता कौशल्या धाम के निर्माण से छत्तीसगढ़ भविष्य में विश्व स्तरीय धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनने जा रहा है।
“कुंभ का छोटा रूप है कल्प”: महाराज राम बालक दास
मीडिया से चर्चा करते हुए राम बालक दास महाराज ने स्पष्ट किया कि वेदों और पुराणों में वर्णित चार मुख्य कुंभ के बाद राजिम को ‘कुंभ कल्प’ का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने कहा, “कल्प का अर्थ होता है छोटा, यानी कुंभ का प्रतिरूप।” उन्होंने याद किया कि कैसे 21 साल पहले शासन की जिम्मेदारी पर उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण कर अखाड़े के संतों को राजिम आने का निमंत्रण दिया था, जिसके बाद इस भव्य परंपरा की नींव पड़ी।
बालोद में बनेगा विश्व का सबसे बड़ा माता कौशल्या धाम
महाराज ने एक बड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि बालोद जिले में 35 करोड़ की लागत से माता कौशल्या का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है। वर्ष 2026 में इस मंदिर की स्थापना होगी और माता कौशल्या की प्रतिमा विराजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में विश्व भर से लोग छत्तीसगढ़ माता कौशल्या के दर्शन करने आएंगे।
संतों का सानिध्य और मानस गान
कुंभ मेले में प्रतिदिन छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित मानस मंडलियों द्वारा रामचरितमानस का पाठ किया जा रहा है। महाराज ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संगम में स्नान करने और कुंभ कल्प की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करने के लिए सादर आमंत्रित किया है।
- महत्व: चार मुख्य कुंभ के बाद इसे ‘पांचवा कुंभ कल्प’ माना गया है।
- इतिहास: महाराज ने 21 वर्ष पहले संतों को राजिम से जोड़ने का अभियान शुरू किया था।
- बड़ा प्रोजेक्ट: बालोद में 35 करोड़ की लागत से कौशल्या माता मंदिर का निर्माण।
- आयोजन: मेले में हनुमत महायज्ञ और रामचरितमानस का नियमित वाचन।
राजिम कुंभ कल्प 2026 में महाशिवरात्रि के मुख्य पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है, जहां प्रशासन और संत समाज मिलकर भव्य शाही स्नान की तैयारी कर रहे हैं।



