रायपुर। सामाजिक सरोकारों और जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को पर्दे पर उकेरने वाली हिंदी फीचर फिल्म ‘अरन्य’ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दस्तक दे चुकी है। कलिंगा विश्वविद्यालय के विशेष सहयोग से निर्मित यह फिल्म 10 फरवरी को N Mahi Films OTT App पर रिलीज हुई है, जिसे दर्शकों की ओर से काफी सराहना मिल रही है।

छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में यह फिल्म बेहद खास है क्योंकि यह विकास के नाम पर होने वाले जंगलों के अतिक्रमण और आदिवासी समाज के विस्थापन जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाती है। यह फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर समुदायों के संघर्ष को बड़ी संवेदनशीलता के साथ दुनिया के सामने रखती है।

फिल्म के निर्देशक नितेश झा के अनुसार, ‘अरन्य’ उन आवाजों को मंच देती है जो अक्सर विकास की चकाचौंध में अनसुनी रह जाती हैं। N Mahi Films Production एवं NIIRA Educom के बैनर तले बनी यह फिल्म दिखाती है कि कैसे प्रशासनिक अनुमतियों का गलत इस्तेमाल कर आदिवासियों के अधिकारों का हनन किया जाता है।

See also  जब कलेक्टर बने टीचर, 10 वीं के स्टूडेंट्स की लगाई क्लास, आंगनबाड़ी में भी बच्चों के बौद्धिक स्तर को परखा

कलिंगा विश्वविद्यालय के फिल्म मेकिंग विभाग ने इस फिल्म के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय ने तकनीकी संसाधन, लोकेशन सपोर्ट, पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाएं और उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर इस परियोजना को अकादमिक और पेशेवर दोनों स्तरों पर मजबूती दी।

छायांकन निर्देशक साहिल कुमार ने प्राकृतिक लोकेशनों पर फिल्मांकन कर जंगल की वास्तविक आत्मा को पर्दे पर जीवंत किया है। फिल्म में अनिशा मोहंती, युवराज सिंह, आलोक मिश्रा, अभिषेक शर्मा, अनमोल पांडेय, सुधांशु सिंह, नितेश झा सहित कई कलाकारों ने सशक्त अभिनय किया है। संगीत निर्देशन बबला बागची का है।

OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज के साथ अरन्य केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज से संवाद का माध्यम बनकर उभरी है। यह दर्शकों को सोचने, प्रश्न करने और पर्यावरण तथा आदिवासी अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश देती है।