रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर संगठन को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार की है। पार्टी पहली बार राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में आधिकारिक पंचायत अध्यक्ष नियुक्त करने जा रही है, जो सीधे तौर पर ग्रामीण मतदाताओं और पार्टी की विचारधारा के बीच सेतु का काम करेंगे।
यह कदम छत्तीसगढ़ की ग्रामीण राजनीति में शक्ति संतुलन बदल सकता है। अब तक पार्टी का ढांचा ब्लॉक स्तर तक ही सीमित था, लेकिन अब 20,363 पंचायतों में अध्यक्ष होने से कांग्रेस स्थानीय मुद्दों पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकेगी और भाजपा के ग्रामीण वोट बैंक में सीधे सेंध लगाने की कोशिश करेगी।
पंचायत से ब्लॉक तक जिलाध्यक्षों की बढ़ी ताकत
नई दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की उपस्थिति में हुई जिलाध्यक्षों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है। अब जिलाध्यक्षों को सीधे नियुक्ति का अधिकार दिया गया है, ताकि ऊपर से नाम तय होने में समय बर्बाद न हो। इस नई व्यवस्था से जिलों में गुटबाजी पर अंकुश लगेगा और जिलाध्यक्षों की राजनीतिक हैसियत भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी।
पार्टी का लक्ष्य केवल पद बांटना नहीं, बल्कि एक ऐसा नेटवर्क खड़ा करना है जो गांव की हर छोटी-बड़ी समस्या और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत की रिपोर्ट सीधे प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा सके।
परफॉर्मेंस के लिए कलर कोड सिस्टम
कांग्रेस ने अब जिलाध्यक्षों की जवाबदेही तय करने के लिए एक सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया है। उनके कामकाज का मूल्यांकन तीन श्रेणियों में किया जाएगा जैसे ग्रीन जोन में संगठन पूरी तरह सक्रिय है, सदस्यता अभियान और जनसंपर्क मजबूत है। येलो जोन में औसत प्रदर्शन, जहां संगठन को सुधार की सख्त जरूरत है। वही रेड जोन में संगठनात्मक सुस्ती और कम गतिविधियों वाले जिले, जहां नेतृत्व परिवर्तन की संभावना रहेगी। ऐसे में संभावना है कि कांग्रेस आगामी कुछ हफ्तों में जिलाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान कर नियुक्तियां शुरू करेंगे।
आंकड़ों में कांग्रेस का नया ढांचा
- जिलाध्यक्ष (DCC) 41
- ब्लॉक अध्यक्ष 307
- मंडल अध्यक्ष 1,370
- पंचायत अध्यक्ष 20,363


