Raipur Municipal Corporation joint survey for colony handover.

टीआरपी। राजधानी रायपुर के निवासियों के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य शासन के निर्णय के अनुसार, रायपुर नगर निगम जल्द ही रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की 9 प्रमुख आवासीय कॉलोनियों को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने की प्रक्रिया शुरू करेगा। हालांकि, यह पूरी कार्यवाही शासन द्वारा जारी होने वाली विस्तृत नियमावली और संयुक्त सर्वे के बाद ही संपन्न होगी।

इन कॉलोनियों के हैंडओवर से स्थानीय निवासियों को सफाई, स्ट्रीट लाइट और सड़क मरम्मत जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए अब अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। एक ही एजेंसी (नगर निगम) के पास जिम्मेदारी होने से जनसमस्याओं का निवारण त्वरित गति से हो सकेगा।

संयुक्त सर्वे से होगा व्यवस्थाओं का आंकलन

हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू करने से पहले नगर निगम, RDA और हाउसिंग बोर्ड की टीमें संयुक्त रूप से जमीनी सर्वे करेंगी। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य इन कॉलोनियों में मौजूदा नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। रायपुर नगर निगम के नगर निवेशक के अनुसार, तकनीकी परीक्षण के माध्यम से यह देखा जाएगा कि हस्तांतरण के समय बुनियादी ढांचा किस स्थिति में है।

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बुनियादी ढांचे की चुनौतियों पर फोकस

सर्वेक्षण के दौरान मुख्य रूप से पेयजल आपूर्ति तंत्र, सीवरेज नेटवर्क, आंतरिक सड़कों और उद्यानों की जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कई कॉलोनियों में पाइपलाइन और नालियां 15 से 20 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं, जिनकी उपयोग अवधि लगभग समाप्त है। हैंडओवर से पहले निगम को इन पर आने वाले वित्तीय भार और अतिरिक्त स्टाफ की रूपरेखा तय करनी होगी ताकि भविष्य में रखरखाव में कोई बाधा न आए।

शासन के निर्देशों का इंतजार

वर्तमान में नगर निगम को शासन स्तर से विस्तृत दिशा-निर्देशों और नियमावली का इंतजार है। जैसे ही स्पष्ट आदेश प्राप्त होंगे, तीनों एजेंसियां सक्रिय होकर फील्ड सर्वे का काम शुरू कर देंगी। स्पष्ट किया गया है कि अद्यतन स्थिति में कोई भी कार्यवाही बिना शासन की नियमावली के आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

हस्तांतरण के दायरे में कुल 9 आवासीय कॉलोनियां शामिल की गई हैं।

कई क्षेत्रों में जल आपूर्ति की पाइपलाइन डेढ़ दशक (15 वर्ष) से अधिक पुरानी है।

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शासन की नियमावली प्राप्त होते ही संयुक्त दल का गठन किया जाएगा, जो वार्डवार रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपेगा। इसके बाद ही आधिकारिक तौर पर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी।