रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को रोकने के लिए साय सरकार आगामी बजट सत्र में नया कानून ला सकती है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने संकेत दिए हैं कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है और 24 फरवरी को पेश होने वाले बजट के दौरान या उसके बाद इस विधेयक को सदन के पटल पर रखा जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
बता दें कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर और जशपुर में धर्मांतरण एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। प्रस्तावित विधेयक में चंगाई सभाओं पर रोक और जबरन धर्मांतरण पर 10 साल तक की जेल जैसे कड़े प्रावधान हो सकते हैं, जो राज्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
इंडिया एआई समिट में प्रदर्शन पर बरसे डिप्टी सीएम
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट 2026 (India AI Summit) में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन पर विजय शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे शर्टलेस नहीं, बल्कि सेमलेस प्रदर्शन करार दिया।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जहां विदेशी प्रतिनिधि मौजूद हों, वहां इस तरह का व्यवहार देश की छवि को नुकसान पहुंचाता है। हर मंच को राजनीति का अखाड़ा बनाना उचित नहीं है।
मतदाता सूची (SIR) के अंतिम प्रकाशन पर बोलते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सूची को पूरी तरह पारदर्शी और शुद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर सूची को दुरुस्त करना आवश्यक है ताकि ऐसे लोग जो क्षेत्र में नहीं रह रहे हैं या जो अवैध घुसपैठिये हैं, उनके नाम हटाए जा सकें।
प्रस्तावित विधेयक में क्या हो सकता है?
- धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य हो सकता है।
- जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने पर 2 से 10 साल की कैद।
- कम से कम 25,000 रुपये के आर्थिक दंड का प्रावधान।
- इस कानून के तहत दर्ज मामले गैर-जमानती श्रेणी में रखे जा सकते हैं।
बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है। 24 फरवरी को बजट पेश होने के बाद अगले कुछ दिनों में सरकार इस बहुप्रतीक्षित विधेयक को सदन में पेश कर सकती है। यदि यह पारित होता है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां धर्मांतरण विरोधी कानून सबसे सख्त है।


