रायपुर। छत्तीसगढ़ को इंडस्ट्रियल हब बनाने की दिशा में विष्णुदेव साय सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत अब निजी डेवलपर्स और बिल्डर्स खुद का इंडस्ट्रियल पार्क या प्राइवेट इंडस्ट्रियल एरिया बना सकेंगे। इस ऐतिहासिक फैसले का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है, जिससे अब उद्योगों के लिए केवल सरकारी जमीन पर निर्भरता खत्म होगी।

20 करोड़ का निवेश और प्लग एंड प्ले मॉडल
सरकार ने निजी क्षेत्र को पार्टनर बनाने के लिए मानक तय कर दिए हैं। यदि किसी डेवलपर के पास न्यूनतम 15 एकड़ जमीन और 20 करोड़ रुपए का निवेश बजट है, तो वह अपना इंडस्ट्रियल पार्क शुरू कर सकता है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत प्लग एंड प्ले यूनिट्स हैं, जहाँ उद्यमी को सिर्फ मशीन लगानी होगी और काम शुरू हो जाएगा।
लघु एवं सहायक उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया के अनुसार, प्राइवेट इंडस्ट्रियल स्टेट से जमीन की कमी की सबसे बड़ी बाधा दूर होगी। छोटे उद्यमी हमेशा जिला मुख्यालय के 10-15 किमी के भीतर जगह चाहते हैं, जो अब संभव हो पाएगा।
सरकार का बड़ा इंसेंटिव प्लान, क्या-क्या मिलेगी छूट?
| छूट/अनुदान का प्रकार | मिलने वाली राहत |
| स्टांप शुल्क (Stamp Duty) | 100% पूरी छूट |
| डायवर्सन शुल्क | 100% पूरी छूट |
| जमीन पंजीयन (Registration) | 50% तक की प्रतिपूर्ति |
| अधोसंरचना अनुदान | लागत का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी |
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान कम होगा, तो राज्य सरकार उस अंतर (Gap) की राशि की भरपाई करेगी ताकि निवेशक को नुकसान न हो।
सरकार अब सभी 33 जिलों से इसके लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित कर रही है। हरियाणा और राजस्थान की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी अब निजी इंडस्ट्रियल पार्कों का जाल बिछेगा, जिससे प्रदेश की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान तेजी से बढ़ेगा।
ये हैं पात्रता शर्तें
राज्य सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए डेवलपर के पास कम से कम 15 एकड़ जमीन और 20 करोड़ रुपए का निवेश होना अनिवार्य है। इस जमीन पर कम से कम 5 उद्योग स्थापित करने होंगे। नीति के अनुसार, कुल जमीन का 60 प्रतिशत हिस्सा उद्योगों के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि शेष 40 प्रतिशत पर कमर्शियल स्पेस, लेबर क्वार्टर और एटीएम जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के अनुसार, इस पहल से प्रदेश में औद्योगिकीकरण को नई गति मिलेगी। हालांकि शुरुआत चार प्रमुख शहरों दुर्ग, नांदगांव, नवारायपुर, जांजगीर-चांपा से हो रही है, लेकिन राज्य के सभी जिलों से इसके लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।


