रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा 23 फरवरी 2026 को अम्बागढ़ चौकी सत्र न्यायालय परिसर में “साइबर विधि एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अधिवक्ता संघ, अम्बागढ़ चौकी के सौजन्यपूर्ण सहयोग से न्यायालय परिसर में सम्पन्न हुआ।

संगोष्ठी में अनेक अधिवक्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम में अधिवक्ता एम. बी. मिलिंद (अध्यक्ष), अधिवक्ता मनोज यादव (उपाध्यक्ष), अधिवक्ता निखिल कुमार झा (सचिव), अधिवक्ता धनंजय पांडे तथा अधिवक्ता रफीक खान की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे विधि समुदाय का सशक्त समर्थन परिलक्षित हुआ।

सत्र को संबोधित करते हुए कलिंगा विश्वविद्यालय के विधि संकाय की सहायक प्राध्यापिका सुश्री कृतिका साहू ने साइबर विधि के प्रमुख आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल अपराधों, नियामक व्यवस्थाओं तथा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के साक्ष्यात्मक महत्व को स्पष्ट किया। साथ ही साइबर अपराधों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों एवं न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।

See also  मार्च सत्र के लिए परीक्षा की तारीखों में बदलाव, देखें JEE Main 2021 का नया शेड्यूल

तकनीक पर बढ़ती निर्भरता तथा साइबर संबंधी वादों में निरंतर वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए, चर्चा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आधुनिक विधि-व्यवहार में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से संबंधित वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं तथा न्यायिक मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति भी रही, जिनमें परिवार न्यायालय के न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश, अपर सत्र न्यायाधीश तथा सिविल न्यायाधीश सम्मिलित रहे। यह उपस्थिति न्यायपालिका की निरंतर अध्ययन एवं क्षमता संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कलिंगा विश्वविद्यालय समय-समय पर ऐसे प्रयास करता रहा है जो शैक्षणिक संस्थानों और न्यायपालिका के मध्य सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करते हैं। बार एवं बेंच से प्राप्त उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से प्रेरित होकर विश्वविद्यालय अब छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला न्यायालयों में इसी प्रकार के विषयक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है, जिससे विधि शिक्षा और न्यायालयीन कार्यप्रणाली के मध्य संबंध और सुदृढ़ हो सके। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ तथा न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने एवं व्यावसायिक उन्नयन में सहयोग देने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता पुनः अभिव्यक्त की गई।

See also  कलिंगा विश्ववियालय में “विकसित भारत में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका” पर अतिथि व्याख्यान