टीआरपी डेस्क। भारतीय न्यायपालिका और शिक्षा जगत के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। NCERT की 8वीं कक्षा की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ और लंबित मामलों के आंकड़ों को शामिल किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार को स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी और कोर्ट इस मामले पर खुद संज्ञान (Suo Moto) लेने पर विचार कर रहा है।
दिग्गज वकीलों ने कोर्ट में उठाया मुद्दा
बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचते हुए कहा कि 8वीं के छोटे बच्चों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाना चिंताजनक है। वहीं, एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाया कि भ्रष्टाचार के लिए केवल न्यायपालिका को ही क्यों चुना गया? राजनीति या ब्यूरोक्रेसी में भ्रष्टाचार पर किताब मौन क्यों है? इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि यह अध्याय संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के ही खिलाफ नजर आता है।
CJI बोले- “सब परेशान हैं, मैं खुद देखूंगा”
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बार और बेंच की चिंता पर कहा, “मुझे हाई कोर्ट के जजों के ढेरों कॉल और मैसेज आ रहे हैं। सिस्टम का हर स्टेकहोल्डर परेशान है। कानून अपना काम करेगा, मैं इस मामले को खुद देखूंगा।”
क्या लिखा है NCERT की नई किताब में?
NCERT ने अपनी नई किताब में न्यायपालिका की चुनौतियों को विस्तार से बताया है, जिसने विवाद खड़ा कर दिया है। किताब में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट में 62.40 लाख और निचली अदालतों में 4.70 करोड़ केस पेंडिंग हैं। चैप्टर में लिखा है कि लोग न्यायपालिका के अलग-अलग स्तर पर भ्रष्टाचार का सामना करते हैं, जिससे गरीबों की न्याय तक पहुंच कठिन हो जाता है। किताब में पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई के जुलाई 2025 के उस बयान का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है।
जवाबदेही और शिकायत तंत्र का भी जिक्र
हालांकि, किताब में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम (महाभियोग) और CPGRAMS जैसे शिकायत निवारण तंत्र के बारे में भी जानकारी दी गई है। किताब के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच इस सिस्टम के जरिए 1,600 से ज्यादा शिकायतें मिली थीं।


