बिलासपुर। जिला अस्पताल बिलासपुर के पीछे स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में प्रसूता के परिजन से डिलीवरी के एवज में पैसे मांगने का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसके बाद दो नर्सों को सस्पेंड करते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
दरअसल वायरल वीडियो में प्रसूता के परिजन नर्स को धन्यवाद देते हैं, लेकिन लक्ष्मी वर्मा कथित तौर पर कहती हैं, “धन्यवाद से काम नहीं चलेगा, एक मैं लूंगी और पांच इनको दे दो।” परिजन पांच सौ रुपए देने की बात कहते हैं, लेकिन नर्स एक हजार रुपए से कम लेने से इनकार करती हैं।
सरकारी अस्पताल की बदहाली का रोना रोया
बातचीत के दौरान यह भी सुनाई दे रहा है, दवाई-पानी सहित सबकी खुशी से ‘एक मैं लूंगी, पांच उन्हें दे दो। वीडियो में नर्स कहती हैं कि ‘सरकारी अस्पताल है भैया, यहां एक ग्लव्स भी नहीं है… यहां सब कुछ का पैसा लगता है। अगर नहीं है तो मत दीजिए, मैं हाथ जोड़ती हूं, लेकिन एक से कम नहीं लूंगी।
केवल वार्ड से हटाया, तब लगी फटकार
वीडियो वायरल होने की जानकारी मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता ने संबंधित नसों को लेबर ओटी से हटा दिया और जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी, जिसमें डॉ. प्रतीक प्रधान, डॉ. ममता सलूजा और डॉ. नवीन साव शामिल हैं। इसके बाद कलेक्टर ने जब फटकार लगाई तब स्टाफ नर्स लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया के निलंबन का आदेश जारी किया गया।
पहले भी लेनदेन के मामले सामने आए
सिविल सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता ने अपनी सफाई में कहा कि वे नियमित रूप से अस्पताल का निरीक्षण करते हैं और मरीजों व परिजनों से अपील करते हैं कि यदि कोई पैसे की मांग करे तो रसीद मांगें और लिखित शिकायत करें। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पहले भी लेन-देन के मामले सामने आए हैं। एक प्रकरण में तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण द्वारा एक डॉक्टर को निलंबित किया गया था। इसके बाद किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। डॉ. गुप्ता ने कहा कि डिलीवरी के एवज में पैसे मांगने की औपचारिक शिकायत अभी तक नहीं मिली थी, लेकिन वायरल वीडियो के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जा रही है।


