Raigarh Industrial Pollution issue in Chhattisgarh Vidhan Sabha.

टीआरपी। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज रायगढ़ जिले में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण और फ्लाईएश (राख) की अवैध डंपिंग का मुद्दा गरमाया रहा। विपक्ष ने पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और विभागीय मंत्री ओ पी चौधरी के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया।

रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ का प्रमुख औद्योगिक हब है, जहाँ दर्जनों बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राख (फ्लाईएश) स्थानीय कृषि, हवा और पानी को दूषित कर रही है। अवैध डंपिंग के कारण सड़कों पर उड़ती राख न केवल दुर्घटनाओं का सबब बन रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है।

मंत्री के जवाब पर बिफरा विपक्ष: 49 मामलों में हुई कार्रवाई

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा कि वर्ष 2023 से 4 फरवरी 2026 तक उद्योगों द्वारा अवैध फ्लाईएश डंपिंग के कितने मामले आए। इसके जवाब में पर्यावरण मंत्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस अवधि में 24 ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली राख का उपयोग खदान भराव के लिए किया जा रहा है और बिना अनुमति डंपिंग के 49 मामले सामने आए हैं, जिन पर विभागीय कार्रवाई की गई है।

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विपक्ष ने मंत्री के इन आंकड़ों को नाकाफी बताया। विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि रायगढ़ जिले में रोजाना सैकड़ों टन राख अवैध रूप से खुले मैदानों और सड़कों के किनारे डंप की जा रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी इसे रोकने के बजाय उद्योगों को संरक्षण दे रहे हैं।

अधिकारियों पर गुमराह करने का आरोप

चर्चा के दौरान तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस सदस्यों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी अपने मंत्री को गलत जानकारी दे रहे हैं और सदन को गुमराह किया जा रहा है। विपक्ष ने सरकार से ठोस कार्ययोजना की मांग की, जिससे कोयला परिवहन और फ्लाईएश से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके। जब मंत्री के जवाब से विधायक संतुष्ट नहीं हुए, तो पूरी कांग्रेस पार्टी ने विरोध स्वरूप सदन से बाहर (वॉकआउट) जाने का फैसला किया।

  • अवधि: वर्ष 2023 से फरवरी 2026 तक का डेटा माँगा गया।
  • संयंत्र: रायगढ़ के 24 पावर प्लांट रडार पर।
  • कार्रवाई: विभाग के अनुसार 49 अवैध डंपिंग के मामलों पर एक्शन लिया गया।
  • मुख्य मुद्दा: फ्लाईएश का खदानों में भराव और परिवहन के दौरान उड़ती धूल।
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विपक्ष के कड़े रुख के बाद अब पर्यावरण विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वह रायगढ़ में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए। आगामी दिनों में प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CECB) की टीम द्वारा औचक निरीक्षण की संभावना बढ़ गई है।