टीआरपी डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली में शराब नीति में कथित भ्रष्टाचार के मामले में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए बड़ी खुशखबरी आई। दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई (CBI) केस में आरोप मुक्त (Discharged) कर दिया है। फैसले के बाद केजरीवाल ने भावुक होते हुए कहा, ‘मैं भ्रष्ट नहीं हूं’।

क्या थी नई शराब नीति?
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की थी। इसके तहत दिल्ली को 32 जोन में बांटकर 849 प्राइवेट दुकानें खोलने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार का तर्क था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।

घोटाले के आरोपों का मुख्य आधार
विपक्ष और जांच एजेंसियों ने इस नीति पर तीन मुख्य आरोप लगाए थे:

लाइसेंस फीस में भारी वृद्धि: एल-1 लाइसेंस की फीस 25 लाख से बढ़ाकर सीधे 5 करोड़ कर दी गई। आरोप था कि यह छोटे कारोबारियों को बाहर कर बड़े शराब माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया।

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मुनाफे का खेल: आरोप था कि एक बोतल (750ml) पर रिटेल कारोबारी का मुनाफा 33 रुपये से बढ़ाकर 363 रुपये कर दिया गया, जबकि सरकार का मुनाफा 329 रुपये से घटकर महज 3.78 रुपये रह गया।

क्लबिंग और एकाधिकार: पूरी दिल्ली में शराब की दुकानों को 100% प्राइवेट कर दिया गया, जिससे सिंडिकेट को बढ़ावा मिलने का दावा किया गया।

जांच का सफर: छापेमारी से गिरफ्तारी तक
इस मामले की जांच तब शुरू हुई जब दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल (LG) ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। अगस्त 2022 में मनीष सिसोदिया के घर छापेमारी हुई और बाद में ईडी (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। इस मामले में विजय नायर, संजय सिंह और के. कविता की भी गिरफ्तारियां हुईं।

शराब नीति घटनाक्रम

  • 17 नवंबर 2021: नई शराब नीति लागू हुई।
  • 22 जुलाई 2022: उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की।
  • मार्च 2023: मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी।
  • 21 मार्च 2024: अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी।
  • आज का फैसला: सीबीआई केस में केजरीवाल और सिसोदिया आरोप मुक्त।
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