टीआरपी डेस्क। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सोमवार को तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। नाम वापसी के आखिरी दिन यानी 10 मार्च को 7 राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। हालांकि, बिहार, हरियाणा और ओडिशा में सियासी समीकरण अब भी उलझे हुए हैं, जिसके चलते भाजपा ने वहां अपने विशेष पर्यवेक्षक तैनात कर दिए हैं।
शरद पवार और अठावले समेत 26 नेता पहुंचे संसद
बता दें कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मुकाबला नहीं होने के कारण उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया है। महाराष्ट्र से एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले एक बार फिर राज्यसभा पहुंच गए हैं। वहीं, तेलंगाना से कांग्रेस के दिग्गज नेता अभिषेक मनु सिंघवी को भी निर्विरोध चुन लिया गया है। हैरानी की बात यह है कि छत्तीसगढ़ की सीटों पर भी स्थिति साफ हो चुकी है, लेकिन असली ‘खेला’ अब उन तीन राज्यों में होना है जहां उम्मीदवारों की संख्या सीटों से ज्यादा है।
बिहार, हरियाणा और ओडिशा में मचेगा घमासान
दरअसल, जिन 11 सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग होनी है, वहां क्रॉस वोटिंग और जोड़-तोड़ की संभावनाएं बढ़ गई हैं। बिहार की 5 सीटों के लिए भाजपा ने छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को पर्यवेक्षक बनाकर पटना भेजा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन मैदान में हैं, लेकिन आरजेडी ने भी अपने उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। यही हाल हरियाणा और ओडिशा का भी है, जहां संख्या बल के बावजूद निर्दलीय और विपक्षी उम्मीदवार बड़ी पार्टियों का गणित बिगाड़ सकते हैं।
भाजपा की खास रणनीति और पर्यवेक्षकों की तैनाती
हैरानी की बात यह है कि भाजपा ने इन तीन राज्यों के लिए अलग-अलग राज्यों के कद्दावर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। हरियाणा के लिए गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी और ओडिशा के लिए महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। इनका मुख्य काम पार्टी विधायकों को एकजुट रखना और विपक्षी खेमे में सेंधमारी को रोकना है। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे नतीजों का ऐलान कर दिया जाएगा।
प्रशासन और निर्वाचन आयोग की तैयारी
निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि राज्यसभा चुनाव में वोट डालने के लिए सिर्फ विशेष बैंगनी रंग के पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी भी अन्य पेन से लगा मार्क वोट को अमान्य कर देगा। अब सबकी नजरें 16 मार्च की शाम पर टिकी हैं कि क्या भाजपा इन तीन राज्यों में विपक्षी वोटों में सेंध लगा पाएगी या विपक्ष एकजुट होकर कोई बड़ा उलटफेर करेगा।



