छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 9वें दिन गुरुवार को घरेलू गैस LPG के मुद्दे ने सदन का तापमान बढ़ा दिया। प्रदेश में गहराए गैस संकट और इसकी कालाबाजारी को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव लेकर आई, जिस पर सत्ता पक्ष ने तीखी आपत्ति जताई। देखते ही देखते सदन में नारेबाजी शुरू हो गई और हंगामा इतना बढ़ा कि गर्भगृह में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
अजय चंद्राकर की आपत्ति
बता दें कि जैसे ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने गैस संकट पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पढ़ना शुरू किया, भाजपा के दिग्गज विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि गैस केंद्र सरकार का विषय है, इसलिए इस पर राज्य की विधानसभा में चर्चा नहीं की जा सकती। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई। हैरानी की बात यह है कि भारी हंगामे के चलते कार्यवाही को 5 मिनट के लिए रोकना भी पड़ा।
भूपेश बघेल का बड़ा आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि आज पूरे छत्तीसगढ़ में आम जनता को गैस सिलेंडर के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में गैस की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। बघेल ने तर्क दिया कि जब आपूर्ति की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी है, तो फिर सदन में इस पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता परेशान है और सरकार केंद्र का हवाला देकर पल्ला झाड़ रही है।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर डॉ. चरणदास महंत ने जनता का दर्द बयां करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि गैस का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने कहा, जिनके घरों में शादियां हैं, उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। पूरा छत्तीसगढ़ परेशान है। हालांकि, सत्ता पक्ष के विरोध और हंगामे के बीच सभापति ने इस स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेसी विधायक सदन के बीचों-बीच (गर्भगृह) पहुँच गए, जिसके बाद उन्हें नियमों के तहत निलंबित कर दिया गया।


