रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होते ही सदन का माहौल गरमा गया। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय जम्बूरी आयोजन में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप लगाते हुए सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया। विपक्ष ने इस पूरे मामले की विधानसभा समिति से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की, लेकिन स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के साफ इनकार के बाद नाराज कांग्रेसी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
टेंडर का खेल: 90 से सीधे 52 पर आए बिंदु?
बता दें कि विधायक राघवेंद्र सिंह ने सदन में दस्तावेजों का हवाला देते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जम्बूरी के आयोजन में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं:
टेंडर से पहले काम: आरोप है कि आधिकारिक टेंडर निकलने से पहले ही ग्राउंड पर काम शुरू कर दिया गया था।
तारीखों का झोल: पहला टेंडर 10 दिसंबर 2025 को लगा, जिसे निरस्त कर दूसरा टेंडर 23 दिसंबर 2025 को किया गया।
शर्तों में बदलाव: जम्बूरी आयोजन के लिए जो 90 मानक बिंदु (Points) तय थे, उन्हें घटाकर 52 कर दिया गया। विधायक ने पूछा कि आखिर किसकी मिलीभगत से गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया?
शिक्षा मंत्री- सब नियमों के तहत हुआ
गौरतलब है कि आरोपों का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि जम्बूरी का आयोजन बालोद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की देखरेख में हुआ और राष्ट्रीय मुख्यालय दिल्ली के निर्देशानुसार ही बालोद को चुना गया था। मंत्री ने भ्रष्टाचार के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूरी राशि ‘छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम’ के तहत ही खर्च की गई है, इसलिए किसी अलग जांच की जरूरत नहीं है।
आखिर क्या थी जम्बूरी?
दरअसल, स्काउट-गाइड के इस बड़े आयोजन को लेकर बालोद और रायपुर के बीच खींचतान पहले से ही चर्चा में थी। विपक्ष का दावा है कि क्रियान्वयन एजेंसी ने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी की। नेता प्रतिपक्ष और अन्य कांग्रेसी सदस्यों ने मांग की कि जब मामला इतना गंभीर है, तो दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए विधानसभा की जांच समिति बनाने में सरकार को परहेज क्यों है?
मंत्री के जवाब और जांच से मना करने के बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन की कार्यवाही से बाहर जाने (वॉकआउट) का फैसला किया।


