टीआरपी डेस्क। आज 19 मार्च 2026 का दिन भारतीय निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। ग्लोबल मार्केट से आए खराब संकेतों और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के चलते घरेलू शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2100 अंक से ज्यादा फिसल गया, जिससे निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये कुछ ही घंटों में डूब गए।

बाजार में मची चौतरफा बिकवाली

मैदानी सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ सेंसेक्स ही नहीं बल्कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी इंडेक्स भी 600 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। इसमें 2170 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। 600 अंकों से ज्यादा टूटकर इंडेक्स महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के नीचे चला गया है। कोहराम सिर्फ भारत में नहीं है, बल्कि जापान से लेकर कोरिया तक के शेयर बाजारों में बिकवाली का दौर जारी है।

चांदी में 5% की गिरावट, सोना भी पस्त

शेयर बाजार के साथ-साथ कमोडिटी मार्केट (MCX) में भी हाहाकार मचा है। चांदी की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावट देखी गई है। कीमतों में अचानक आए इस ‘क्रैश’ ने खरीदारों को असमंजस में डाल दिया है।

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कच्चे तेल में लगी आग, 114 डॉलर के पार

एक तरफ बाजार गिर रहा है, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम अब 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गए हैं। तेल की कीमतों में आए इस उबाल ने भारत जैसे देश के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि इससे आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा और महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ सकती है।

क्यों मची है यह अफरा-तफरी?

गौरतलब है कि इजरायल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया भर के बाजारों का मूड खराब कर दिया है। कच्चे तेल की सप्लाई रुकने के डर से तेल महंगा हो रहा है, वहीं वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक अपना पैसा शेयर बाजार से निकालकर सुरक्षित ठिकानों की ओर ले जा रहे हैं। प्रशासन और बाजार विशेषज्ञ फिलहाल इस स्थिति को ‘पैनिक सेलिंग’ मान रहे हैं। अगर ग्लोबल हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारतीय बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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