टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को सदन के पटल पर रखा। इस विधेयक के पेश होते ही कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के चलते सदन की कार्यवाही में भी व्यवधान देखने को मिला।
गृह मंत्री ने दिया सुप्रीम कोर्ट का हवाला
विधेयक पेश करते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह कानून प्रदेश की सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए जरूरी है। उन्होंने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और टिप्पणियों का भी हवाला दिया। सरकार का तर्क है कि 2006 के पुराने कानून की तुलना में 2026 का यह नया प्रारूप ज्यादा सख्त और स्पष्ट है, जिससे जबरन या प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की कड़ी आपत्ति
सदन में विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस विधेयक पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि, इसी तरह के धर्मांतरण से जुड़े मामले देश के 11 राज्यों में पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। जब मामला सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है, तो राज्य विधानसभा में इस पर जल्दबाजी में चर्चा करना उचित नहीं है। विपक्ष ने मांग की है कि इस विधेयक की बारीकियों को समझने के लिए इसे तत्काल ‘प्रवर समिति’ को सौंप दिया जाए।
2006 से कितना अलग है 2026 का कानून?
दरअसल, रायपुर के राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि यह कानून पुराने नियमों से कैसे अलग है। बताया जा रहा है कि इस नए विधेयक में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को कड़ा किया गया है। इस कानून के लागू होने के बाद भी ‘घर वापसी’ जैसे अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उसे मूल धर्म में वापसी माना गया है। मैदानी सूत्रों का कहना है कि प्रशासन अब धर्मांतरण की सूचना देने और उसकी जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की तैयारी में है।
सदन से सड़क तक विरोध की गूंज
बता दें कि एक तरफ सदन के भीतर नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा, वहीं सदन के बाहर भी विपक्षी दलों ने इसे जनता के अधिकारों का हनन बताया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस कानून के जरिए असल मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है। अब देखना होगा कि प्रवर समिति की मांग पर सरकार का अगला कदम क्या होता है।


