रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी से लगे धरसींवा क्षेत्र के ग्राम गिरौद में भू-माफियाओं के दुस्साहस की पराकाष्ठा सामने आई है। तहसीलदार धरसींवा द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (SDO) को सौंपी गई एक जांच रिपोर्ट (क्रमांक 1061/वा-तह/2026) ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि राजनीतिक संरक्षण में भू-माफियाओं ने सरकारी तालाबों, चारागाहों और निस्तारी जमीनों को अवैध प्लाटिंग के जरिए ठिकाने लगा दिया है।

चारागाह में बनाई बाउंड्रीवाल

जांच रिपोर्ट के अनुसार, गिरौद के विभिन्न खसरा नंबरों पर अवैध कब्जा किया गया है। चौंकाने वाले खुलासे कुछ इस प्रकार हैं:

खसरा नं. 511/5 (चारागाह): 6.390 हेक्टेयर की इस सरकारी जमीन पर बसंत अग्रवाल ने मुरूम का रास्ता बना दिया गया और पूनम चौधरी द्वारा बाउंड्रीवाल खड़ी कर अतिक्रमण किया गया।

खसरा नं. 630, 634, 636, 644 (सरकारी तालाब/जल निकाय): ये जमीनें राजस्व रिकॉर्ड में ‘पानी के नीचे’ दर्ज हैं। यहाँ ओमप्रकाश सरवैया, बसंत अग्रवाल और प्रिंस अग्रवाल जैसे नामों ने अवैध प्लाटिंग के लिए मुरूम के रास्ते बना दिए और जमीनों को समतल कर दिया।

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बताया गया कि वर्तमान में खसरा नंबर 647/1 और 647/2 पर 60 फीट चौड़ा रास्ता बनाकर बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग का खेल जारी है।

जांच रिपोर्ट में इन नामों का जिक्र

तहसीलदार की इस सरकारी रिपोर्ट में अवैध कब्जेदारों की सूची में प्रमुख नाम सामने आए हैं:

  • बसंत अग्रवाल : ये वहीं शख्स है जो कुछ समय पहले दांवा कर रहे थे कि उनके नाम पर कोई भी जमीन नहीं है। ना कि कभी जमीन कब्जे में शामिल रहे।
  • ओमप्रकाश सरवैया (पिता हिम्मत लाल सरवैया)
  • पूनम चौधरी (पति विनोद कुमार चौधरी)

ग्रामीणों की शिकायत पर हुई कार्रवाई

यह मामला तब प्रकाश में आया जब आवेदक परमानंद साहू और अन्य ग्रामवासियों ने कलेक्टर रायपुर से ‘राजनीतिक संरक्षण’ में हो रहे इस अवैध कारोबार की शिकायत की। पटवारी और राजस्व विभाग की टीम ने जब मौके का मुआयना किया, तो पाया कि सरकारी चारागाह और तालाबों का अस्तित्व ही खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

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तहसीलदार धरसींवा ने जांच प्रतिवेदन के साथ पंचनामा और नजरी नक्शा उच्च अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेज दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदार भू-माफियाओं की बाउंड्रीवाल पर बुलडोजर चलाता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।