नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध (US-Israel vs Iran) के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने के कगार पर है। इस वैश्विक संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (24 मार्च 2026) को राज्यसभा में देश को संबोधित करते हुए भारत की तैयारी और रणनीति साझा की। पीएम ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में रुकावट भारत के लिए अस्वीकार्य है।
पीएम मोदी का संकट समाधान प्लान
पीएम मोदी ने बताया कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। पीएम ने बताया कि वे ईरान, इजरायल और अमेरिका के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं। भारत का लक्ष्य संवाद के जरिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित और खुला रखवाना है। भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है। पीएम ने कहा कि इसे बढ़ाकर 64 लाख मीट्रिक टन करने की योजना है ताकि तेल की कमी न हो। भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके।खाड़ी देशों में रह रहे 1 करोड़ भारतीयों और फंसे हुए क्रू मेंबर्स के लिए 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन स्थापित किए गए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) क्यों इतना अहम है?
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट (तेल का संकरा रास्ता) है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इसकी सबसे कम चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और 35% एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल और 90% एलपीजी (LPG) इसी मार्ग के जरिए आयात करता है। कतर से आने वाली गैस का इकलौता रास्ता भी यही है।
अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ, तो क्या होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके बंद होने का मतलब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हार्ट अटैक जैसा होगा। कच्चे तेल के दाम रातों-रात $120 से $150 प्रति बैरल के पार जा सकते हैं। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। चूंकि भारत खाद (Fertilizers) और एलपीजी के लिए इस रास्ते पर निर्भर है, इसलिए खेती की लागत और रसोई गैस के दाम बढ़ने से भारी महंगाई आएगी। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो भारत के रिफाइनरी प्लांट्स को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ेगा, जिससे बिजली और ईंधन का संकट पैदा हो सकता है।
दरअसल, पीएम मोदी ने टीम इंडिया भावना के साथ राज्य सरकारों को भी अलर्ट रहने और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर स्थिति पर नजर रख रही है और देश की ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा।


