टीआरपी डेस्क। मिडिल ईस्ट (ईरान-इजराइल) में छिड़े युद्ध के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को थामने के लिए बड़ा दांव चला है। दरअसल, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती कर दी है। लेकिन ठहरिए, अगर आप सोच रहे हैं कि आज से आपकी गाड़ी का टैंक सस्ता भरेगा, तो खबर आपके लिए थोड़ी मायूस करने वाली है।

एक्साइज ड्यूटी घटी, पर रेट क्यों नहीं?

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ग्राउंड सूत्रों ने बताया कि मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से तेल कंपनियों को पहले ही भारी नुकसान हो रहा था। सरकार ने यह कटौती आम जनता को सीधे राहत देने के बजाय तेल कंपनियों (OMCs) को डूबने से बचाने के लिए की है। दरअसल, तेल कंपनियां प्रति लीटर पर जो घाटा सह रही थीं, यह 10 रुपये की राहत उस घाटे की भरपाई करेगी। आसान भाषा में कहें तो, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से रुक गए हैं, लेकिन कम नहीं होंगे।

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बता दें कि ईरान-इजराइल युद्ध के चलते कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। सूत्रों के अनुसार कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय मार्केट में $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी नहीं घटाती, तो पेट्रोल के दाम 110 रुपये के पार जा सकते थे। फिलहाल दिल्ली, जयपुर और रायपुर जैसे शहरों में पुरानी दरें ही लागू रहेंगी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट और सरकार?

पेट्रोलियम मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दुनिया भर में ईंधन की कीमतें 30 से 50% तक बढ़ गई हैं, लेकिन भारत में सरकार ने खुद टैक्स का बोझ सहकर कीमतों को स्थिर रखा है। जयपुर के सांगानेर और रायपुर के टाटीबंध जैसे इलाकों के पेट्रोल पंप डीलर्स का कहना है कि उन्हें फिलहाल रेट घटाने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं।