टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी ने चुप्पी तोड़ी है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने उन्हें 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश जारी किया है। आदेश के बाद अमित जोगी ने एक्स (Twitter) पर एक भावुक पोस्ट साझा की है। उन्होंने कोर्ट के इस फैसले को अप्रत्याशित बताते हुए गंभीर अन्याय होने की बात कही है।

बिना सुनवाई मिला फैसला? अमित जोगी का बड़ा आरोप

दरअसल, अमित जोगी ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया है कि जिस मामले में उन्हें निचली अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था, उस पर हाईकोर्ट ने मात्र 40 मिनट में सीबीआई की अपील स्वीकार कर ली। जोगी ने दावा किया कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि साल 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने उस वक्त छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया था। गौरतलब है कि साल 2007 में निचली अदालत ने इस केस के 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

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बेटे की लड़ाई

ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला वापस हाई कोर्ट पहुंचा। आज हुई सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अमित जोगी को आत्मसमर्पण करने को कह दिया है।

कौन थे रामावतार जग्गी?

दरअसल, रामावतार जग्गी एक बड़े कारोबारी थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल ने कांग्रेस छोड़ी, तो जग्गी भी उनके साथ एनसीपी में शामिल हो गए थे। जग्गी को छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।

इन्हें पहले ही मिल चुकी है सजा

इस केस में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे। इनमें से 28 आरोपी पहले ही उम्रकैद की सजा काट रहे हैं (जिनमें अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे जैसे नाम शामिल हैं)। मामले में बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी ही इकलौते ऐसे शख्स थे जो बरी हुए थे, लेकिन अब उन्हें भी सरेंडर करना होगा।

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23 साल पुराने इस मामले में आए नए मोड़ से उन परिवारों को न्याय की उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रायपुर से लेकर बिलासपुर तक इस फैसले की चर्चा है, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमित जोगी अगले तीन हफ्तों में क्या कदम उठाते हैं।