बिलासपुर। रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से 15 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में तोरवा थाना पुलिस ने तेनिटी इंद्राणी और उसकी बेटी वलिवेती वेंकट नागा कीर्ति के खिलाफ धारा 3(5), 318(4) और 336(3) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, प्रार्थी एन. वेंकट सूर्यप्रताप (68 वर्ष) निवासी सांई भूमि तोरवा, बिलासपुर, निजी क्षेत्र से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि वर्ष अगस्त 2020 में आरोपी महिला तेनिटी इंद्राणी ने फोन कर उनके बेटे एन. विजय किशन विरंच को रेलवे में नौकरी दिलाने का दावा किया।

किश्तों में ले लिए 15 लाख रुपए

शुरुआत में आरोपियों ने नौकरी लगवाने के एवज में 6 लाख रुपये मांगे, बाद में 4 लाख रुपये में बात तय हुई। प्रार्थी ने बेटे के शैक्षणिक दस्तावेज, फोटो और अन्य प्रमाण पत्र आरोपियों द्वारा बताए गए ई-मेल पर भेज दिए। इसके बाद आरोपी मां-बेटी के खातों में अलग-अलग किश्तों में रकम ट्रांसफर की जाती रही। शिकायत के मुताबिक, पहले 4 लाख 50 हजार रुपये जमा कराए गए, फिर समय-समय पर और रकम मांगी जाती रही। आरोपियों ने कभी कोविड, कभी चुनाव, तो कभी मंत्री कोटा, इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट का हवाला देकर प्रक्रिया में देरी बताई।

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ई-मेल के जरिए भेजा नियुक्ति पत्र निकला फर्जी

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि आरोपियों ने रेल मंत्रालय के नाम से एक फर्जी नियुक्ति पत्र भी ई-मेल के जरिए भेजा गया। जिससे पीड़ित परिवार को भरोसा हो गया कि नौकरी लगने वाली है। बाद में वर्ष 2024-25 के दौरान आरोपियों ने और रकम की मांग की, जिसके बाद पीड़ित ने यूपीआई, फोनपे, इंटरनेट बैंकिंग और एनईएफटी के माध्यम से कई बार भुगतान किया। प्रार्थी के अनुसार, कुल 18 बार लेन-देन के जरिए आरोपियों को 15 लाख रुपये दिए गए।

फर्जीवाड़े में कोई संगठित गिरोह तो नहीं..?

पीड़ित ने पुलिस को डिजिटल भुगतान की रसीदें, बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल, ई-मेल, व्हाट्सऐप चैट और कथित ऑफर लेटर भी सौंपे हैं। फिलहाल तोरवा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं यह कोई संगठित नौकरी ठगी गिरोह तो नहीं है।