टीआरपी डेस्क। मिडिल ईस्ट की जंग अब उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां से वापसी का रास्ता नजर नहीं आ रहा। अब तक यह टकराव ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच सिमटा हुआ था, लेकिन अब खाड़ी के देशों पर सीधी तबाही का खतरा मंडराने लगा है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है, जिससे पूरे अरब जगत में खलबली मच गई है।

UAE अब ईरान के निशाने पर क्यों?

दरअसल, तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि UAE इस युद्ध में अब केवल एक दर्शक नहीं रहा, बल्कि वह इजरायल और अमेरिका की सक्रिय मदद कर रहा है। ईरान ने संगीन आरोप लगाए हैं कि UAE ने न केवल अपने सैन्य ठिकाने अमेरिका को सौंप दिए हैं, बल्कि कुछ खास ‘एयर फैसिलिटी’ भी ईरानी ऑपरेशंस के खिलाफ इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है।

ईरान की चेतावनी के 3 बड़े बिंदु

संयम का अंत: ईरान ने साफ कर दिया है कि अब तक वह केवल अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा था, लेकिन अब खाड़ी देशों को दी गई छूट खत्म हो सकती है।अगर ईरान की जमीन या किसी द्वीप (जैसे खार्ग और केशम) पर कब्जा करने की कोशिश हुई, तो हमला जिस देश की धरती से होगा, ईरान उसे अपना सीधा दुश्मन मानेगा। ईरान ने संकेत दिया है कि जवाबी कार्रवाई सिर्फ सेना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि UAE के सरकारी संस्थान, बड़े बिजनेस प्रोजेक्ट्स और निवेश ढांचे को भी निशाना बनाया जाएगा।

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होर्मुज स्ट्रेट में कब्जे की साजिश?

अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईरानी द्वीपों पर कब्जे की योजना बना रहा है। आशंका है कि इस ऑपरेशन के लिए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी बेस का इस्तेमाल होगा। ईरान का दावा है कि हालिया कुछ हमलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के जरिए UAE की जमीन से ही उसे निशाना बनाने में मदद की गई है।

खाड़ी में युद्ध के काले बादल

गौरतलब है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर रहा है, जिससे संकेत मिलते हैं कि जंग का अगला चरण और भी ज्यादा खौफनाक होने वाला है। हालांकि UAE की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब चरम पर है।

जानकारों का कहना है कि अगर ईरान के खिलाफ कोई ग्राउंड इनवेजन (जमीनी हमला) शुरू होता है, तो युद्ध के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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