टीआरपी डेस्क। वैशाख मास की शुरुआत के साथ ही इस साल की पहली बड़ी एकादशी ‘वरुथिनी एकादशी’ की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उलझन बनी हुई है। दरअसल, साल 2026 में तिथियों के फेर के कारण लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि व्रत सोमवार को रखा जाएगा या मंगलवार को।
13 अप्रैल को ही रखा जाएगा व्रत
ज्योतिषियों के मुताबिक, उदया तिथि की गणना के आधार पर वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को ही रखा जाएगा। हालांकि एकादशी तिथि 12 अप्रैल की रात से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन शास्त्रों में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को ही व्रत के लिए प्रधान माना गया है।
शुभ मुहूर्त की जरूरी बातें
एकादशी तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल 2026, रात 08:48 बजे से हो जाएगा। 13 अप्रैल 2026, रात 08:40 बजे तक एकादशी तिथि का समापन हो जाएगा। 14 अप्रैल को सुबह 06:02 से 08:35 के बीच पारण का समय है।
क्यों खास है वरुथिनी एकादशी?
जानकारों ने बताया कि इस एकादशी का महत्व बाकी सामान्य व्रतों से कहीं अधिक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो पुण्य फल कन्यादान और वर्षों की कठिन तपस्या से प्राप्त होता है, वह मात्र इस एक वरुथिनी एकादशी का विधि-विधान से व्रत करने से मिल जाता है। यह व्रत सौभाग्य प्रदान करने वाला और सभी पापों को नष्ट करने वाला माना गया है।
व्रत के दौरान इन नियमों का करें पालन
दरअसल, एकादशी के नियम काफी सख्त होते हैं, जिनका पालन करना फल प्राप्ति के लिए जरूरी है: एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के ‘मधुसूदन’ रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तों को मांस, मदिरा और तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन) से परहेज करना चाहिए। इस दिन खरबूजा, तिल, और जल से भरे पात्र का दान करना बेहद शुभ माना गया है।
गौरतलब है कि अगर आप तय समय के भीतर पारण नहीं करते हैं, तो व्रत का पूर्ण लाभ नहीं मिलता। इसलिए मंगलवार (14 अप्रैल) की सुबह सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने पर ही अपना व्रत खोलें। देशभर के प्रमुख विष्णु मंदिरों में इस दिन विशेष कीर्तन और पूजा का आयोजन किया जाएगा।



