Amit Jogi Supreme Court Hearing: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में सजा पाए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को फिलहाल राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की अगली तारीख 20 अप्रैल तय कर दी है। गौरतलब है कि अमित जोगी ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें बिना पक्ष रखे उम्रकैद की सजा सुनाने का आरोप लगाया गया है।

23 अप्रैल की डेडलाइन, क्या जेल जाएंगे अमित?

बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को अमित जोगी को सरेंडर करने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया था। सूत्रों के अनुसार, यह समय सीमा 23 अप्रैल को खत्म हो रही है। अगर 20 अप्रैल की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक नहीं लगाई, तो अमित जोगी को हर हाल में सरेंडर करना पड़ेगा। दरअसल, हाईकोर्ट ने अमित जोगी को हत्या की साजिश रचने का मुख्य दोषी माना है और 1,000 रुपये के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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वकील का दावा- हमें सुना ही नहीं गया

अमित जोगी के वकील वैभव वालिया के अनुसार हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को बिना उनका पक्ष सुने ही कनविक्ट (दोषी) करार दे दिया। वकील का कहना है कि केस से जुड़े 10,000 से ज्यादा पन्नों के रिकॉर्ड्स हैं, जिनका अध्ययन किए बिना फैसला सुनाया गया। अब अमित जोगी उम्रकैद की सजा और कनविक्शन ऑर्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई अपील दायर करेंगे, जिस पर 20 अप्रैल को एक साथ सुनवाई होगी।

हाईकोर्ट के 78 पन्नों के आदेश में क्या है?

दरअसल, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह पलट दिया है जिसने अमित जोगी को बरी किया था। कोर्ट ने अपने 78 पन्नों के जजमेंट में साफ कहा है कि अमित जोगी 4 जून 2003 को हुई राम अवतार जग्गी की हत्या की साजिश का मुख्य हिस्सा थे। जब अन्य सभी सह-आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, तो अमित जोगी को किसी विशेष कारण के बिना बरी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर उन्हें छह महीने अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

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छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस वक्त सिर्फ इसी केस की चर्चा है। 20 अप्रैल की तारीख जोगी कांग्रेस (JCCJ) के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो प्रदेश की राजनीति में जोगी परिवार का रसूख एक बड़े संकट के दौर से गुजर सकता है।