पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकट स्थिति पैदा कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सीधी और सख्त सैन्य चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
रॉकेट की रफ्तार से बढ़ीं तेल की कीमतें
दरअसल, ट्रंप के बयान के बाद बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। रविवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.4% उछलकर 110.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी क्रूड (WTI) में भी 1.8% की तेजी देखी गई और यह 113.60 डॉलर पर बंद हुआ। मैदानी सूत्रों का कहना है कि अगर तनाव ऐसे ही जारी रहा, तो तेल की कीमतें जल्द ही 120 डॉलर का आंकड़ा छू सकती हैं।
ट्रंप vs ईरान: आर-पार की जंग
गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए ईरान को कड़े सैन्य कदमों के संकेत दिए हैं।
ईरान का रुख: ट्रंप की धमकी के जवाब में ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में जलमार्ग नहीं खोला जाएगा। ईरान का तर्क है कि जब तक युद्ध से हुए नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होती, तब तक यह मार्ग बंद रहेगा।
क्यों अहम है होर्मुज? दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके बंद होने का मतलब है वैश्विक सप्लाई चेन का पूरी तरह ठप होना।
बता दें कि बाजार को स्थिर करने के लिए सऊदी अरब और रूस समेत 8 देशों ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है। मई 2026 से प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल (kbd) अतिरिक्त उत्पादन शुरू किया जाएगा।
- सऊदी अरब व रूस: 62-62 kbd प्रत्येक
- इराक: 26 kbd
- यूएई: 18 kbd
इसके अलावा कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान भी उत्पादन बढ़ाएंगे।
ओमान की कूटनीति: क्या निकलेगा समाधान?
तनाव के बीच ओमान ने मध्यस्थता की कमान संभाली है। रविवार को ओमान के प्रतिनिधियों ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात कर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के विकल्पों पर चर्चा की है।



