टीआरपी डेस्क। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी रिजवान अहमद को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि रिजवान दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों को निशाना बनाने की फिराक में था। उसकी योजना ठीक ‘लाल किला ब्लास्ट’ के पैटर्न पर IED धमाके करने की थी, जिसके लिए वह लंबे समय से जमीन तैयार कर रहा था।

इराक और सीरिया से जुड़े हैं तार

एजेंसियों की जांच में रिजवान का अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन उजागर हुआ है। रिजवान इराक में सक्रिय आईएसआईएस (ISIS) के बड़े कमांडर अबु ओसामा के संपर्क में था। अबु ओसामा ने ही उसे ऑनलाइन बम बनाने की ट्रेनिंग दी थी। वह एक विशेष ऐप के जरिए सीरिया में बैठे अपने आकाओं से बात करता था और उन्हीं के निर्देशों पर काम कर रहा था। इतना ही नहीं, उसने हमले से पहले कई प्रमुख मंदिरों की रेकी भी पूरी कर ली थी।

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नाबालिगों का ब्रेनवॉश और बम बनाने का सामान

रिजवान न केवल हमले की तैयारी कर रहा था, बल्कि वह युवाओं और नाबालिगों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम भी कर रहा था। उसके पास से मॉडिफाइड टेबल घड़ी, 500 ग्राम संदिग्ध केमिकल, टाइमर डिवाइस और बॉल वायरिंग जैसे विस्फोटक बरामद हुए हैं। वह 4 से 5 नाबालिगों के संपर्क में था और उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें बम धमाकों के लिए तैयार कर रहा था। पुलिस का कहना है कि वह खुद पीछे रहकर इन युवाओं से आत्मघाती हमलों को अंजाम दिलाना चाहता था।

जेल से छूटते ही फिर हुआ सक्रिय

मैदानी सूत्रों के अनुसार, रिजवान अहमद का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। उसे साल 2015 में गिरफ्तार किया गया था और वह करीब 8 साल जेल में रहा। साल 2023 में जेल से बाहर आने के बाद उसने अपनी गतिविधियां बंद करने के बजाय दोबारा नेटवर्क खड़ा करना शुरू कर दिया।

स्पेशल सेल की पूछताछ जारी

फिलहाल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल रिजवान से कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस उसके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि देश के भीतर उसके और कितने मददगार सक्रिय हैं। सुरक्षा एजेंसियों के इस समय पर एक्शन लेने से एक बड़ी अनहोनी टल गई है।

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