रायपुर। छत्तीसगढ़ साड़ी घोटाला मामले में एक और नया मोड़ सामने आया है। 2024-25 में जो साड़िया बांटी गई थी उसमें तो घोटाला हुआ ही था। 2025-26 में जो साड़िया बांटी गई उनमें भी 12 करोड़ का भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए खरीदी गई करीब 22 करोड़ रुपये की साड़ियों में भारी अनियमितता की बात सामने आ रही है।
जो ऑडर्र कर रहे थे और जो ऑर्डर ले रहे थे वो एक ही थे
जानकारी के अनुसार इसमें एक बड़े अफसर की भूमिका सामने निकलकर आ रही है। दरअसल बड़े अधिकारी महिला बाल विकास विभाग में थे साथ ही उनके पास खादी ग्राम उद्योग की भी जिम्मेदारी थी। डबल प्रभार की आड़ में इस बड़े घोटाले की पटकथा लिखी गई। इसे इस तरह समझे कि जो खुद अधिकारी थे उन्होंने खुद ऑर्डर किया और खुद को ही ऑर्डर किया।
हैंडलूम से बनने थे बन गए पावरलूम
जो साड़ियां बुनकरों से लेनी थी उन्हें बुनकरों से ना लेकर सूरत से मंगा ली गई और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बांट दिया गया। बता दें कि खबर तो यह भी है कि नियमानुसार नेशनल हैंडलूम बोर्ड से यान की भी खरीदी नहीं की गई। बता दें कि यान एक प्रकार का धागा होता है जो बुनकरों को दिया जाना था। जिससे ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए साड़ियां तैयार की जानी थी।
बिल में स्थानीय बुनकरों का नाम, साड़ियां सूरत से
बता दें कि सरकार की मंशा प्रदेश के स्थानीय बुनकरों को रोजगार देने की थी। नियम के मुताबिक ये साड़ियां छत्तीसगढ़ के बुनकरों से तैयार कराई जानी थी। लेकिन सूत्रों के अनुसार कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया। बुनकरों के नाम पर फर्जी बिलिंग की गई और असल में साड़ियां सूरत से रेडीमेड मंगवाकर सप्लाई कर दी गईं।
जांच में फंस सकता है बड़े साहबों का पेंच
इस पूरे खेल में विभाग के उच्च स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। साड़ियों की गुणवत्ता, दाम और साइज को लेकर प्रदेश भर से शिकायतें मिल रही हैं।
साड़ियों में सामने आई खामियां
- साड़ियों का कपड़ा बेहद खराब स्तर का है।
- तय साइज से छोटी साड़ियां सप्लाई की गई हैं।
- मार्केट रेट से कहीं ज्यादा दाम पर कागजी खानापूर्ति हुई है।
- छत्तीसगढ़ी बुनकर आज भी काम की तलाश में भटक रहे हैं।
TRP के पास मौजूद हैं अहम दस्तावेज
दरअसल, इस पूरे मामले में TRP (The Rural Press) के पास वो दस्तावेज मौजूद हैं जो बताते हैं कि साड़ियों के सैंपल की जांच का परिणाम व्यापारी ने जो दिए थे और विभाग द्वारा की गई जांच दोनों के परिणाम भिन्न आए (2024-25)। इसके के बाद भी भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ाई गई। मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाते हुए अफसरों ने 22 करोड़ के इस बजट में बंदरबांट की है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय बुनकरों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
इस मामले का खुलासा होते हैं महिला एवं बाल विकास विभाग ने मामले की जांच के लिए कहा है साथ ही उन्होंने साड़ी साड़ियां वापस मंगवा ली है।



