बिलासपुर। जिले के कोटा थाना क्षेत्र में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़े गबन का मामला सामने आया है, जिसमें शासकीय राशि का दुरुपयोग कर शासन को लाखों रुपये की क्षति पहुंचाई गई। इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी एक कर्मचारी को कोटा पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य अब भी फरार है, जिसकी तलाश तेज कर दी गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थी नरेंद्र प्रसाद मिश्रा ने 3 मार्च 2026 को थाना कोटा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि शिक्षा विभाग में पदस्थ कर्मचारी नवल सिंह पैकरा लेखपाल/सहायक ग्रेड-02 और देवेंद्र कुमार पालके, विकासखंड कोटा ने मिलकर शासकीय राशि का गबन किया है। आरोप है कि दोनों ने सितंबर 2024 से फरवरी 2025 तक 25,04,422 रुपये और मार्च 2025 से नवंबर 2025 तक 4,57,800 रुपये, इस तरह कुल 29,62,222 रुपये की राशि फर्जी वेतन आहरण के जरिए निकाल ली।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोटा थाना में धारा 316(5), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे प्रहार अभियान के तहत आरोपियों की तलाश तेज की गई। पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी और साइबर सेल की मदद से मोबाइल लोकेशन ट्रैक कर आरोपियों की खोजबीन जारी रखी। इसी दौरान आरोपी देवेंद्र कुमार पालके 38 वर्ष, निवासी धरमपुरा वार्ड क्रमांक 14 करगी रोड कोटा, के संबंध में सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

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भत्तों के नाम पर किया गया गबन

कोटा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में पदस्थ रहे एक भृत्य (प्यून) के खाते में नियम विरुद्ध तरीके से भारी-भरकम राशि ट्रांसफर करने का मामला सामने आया।आरोप है कि सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच, तत्कालीन बीईओ और वर्तमान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय टांडे ने एक भृत्य (देवेंद्र कुमार पालके) के खाते में वर्दी धुलाई और अन्य भत्तों के नाम पर करीब 29 लाख रुपये डाले।

प्यून को अजीबोगरीब भुगतान

यहां प्यून को हर महीने 4 लाख से 4.50 लाख रुपये तक का भत्ता दिया गया, जो सरकारी नियमों के अनुसार असंभव है। इस मामले की जांच तब शुरू हुई जब कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ने इस मामले की शिकायत प्रमुख सचिव से करते हुए प्रभारी डीईओ और जूनियर ऑडिटर सुनील यादव की मिलीभगत का आरोप लगाया। 

बहरहाल फर्जी वेतन आहरण के माध्यम से लगभग 29 लाख रुपये हड़पने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी नवल सिंह पैकरा अब भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक नरेश चौहान, प्रधान आरक्षक सत्य प्रकाश यादव, आरक्षक धर्मेंद्र साहू सहित पुलिस टीम की अहम भूमिका रही।

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