टीआरपी डेस्क। साल 2026 में अक्षय तृतीया का पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। आध्यात्मिक और ज्योतिषीय नजरिए से यह तिथि इतनी महत्वपूर्ण है कि इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ काम के लिए पंडित जी से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं पड़ती।

अक्षय का मतलब: जो कभी खत्म न हो

बता दें कि अक्षय शब्द का अर्थ ही यही है जिसका कभी क्षय न हो, यानी जो कभी नष्ट न हो सके। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष तिथि पर आप जो भी शुभ कार्य करते हैं, खरीदारी करते हैं या दान-पुण्य करते हैं, उसका फल आपको अनंत काल तक मिलता रहता है। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपनी किस्मत चमकाने का सबसे बड़ा मौका मानते हैं।

सोने की खरीदारी और महालक्ष्मी का आगमन

दरअसल, अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी को साक्षात महालक्ष्मी के घर में स्थायी आगमन के समान माना जाता है। शास्त्रों में जिक्र है कि सोना धातु साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान सूर्य का अंश है। इस दिन घर में सोना लाने का सीधा मतलब है कि आप सुख-समृद्धि का आदर के साथ स्वागत कर रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में होते हैं, जो निवेश के लिए सबसे उत्तम समय बनाता है। जानकारों का कहना है कि इस दिन किया गया निवेश न केवल आर्थिक सुरक्षा देता है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा भी लाता है।

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निवेश भी और ईश्वर का आशीर्वाद भी

गौरतलब है कि सोना एक ऐसी धातु है जिसकी चमक और मूल्य कभी कम नहीं होता। ठीक उसी तरह, जैसे इस दिन किए गए पुण्य का फल कभी समाप्त नहीं होता। यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि सही समय पर किया गया छोटा सा निवेश भी जीवनभर की आर्थिक मजबूती प्रदान कर सकता है। यह धातु हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल आशीर्वाद की तरह काम करती है और कठिन समय में सबसे मजबूत सहारा बनती है।

धार्मिक ग्रंथों में स्वर्ण दान का महत्व

सिर्फ खरीदारी ही नहीं, बल्कि धार्मिक ग्रंथों में इस दिन स्वर्ण दान का भी विशेष फल बताया गया है। माना जाता है कि श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए अपनी सामर्थ्य अनुसार दान जरूर करना चाहिए। इससे न केवल धन-धान्य में वृद्धि होती है, बल्कि परिवार पर ईश्वर का अटूट आशीर्वाद सदैव बना रहता है।

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